भारत के स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी और सेनानी
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भारत का स्वतंत्रता संग्राम 1857 के विद्रोह से 1947 की आज़ादी तक लगभग 90 साल चला। इसमें 1857 की योद्धा रानी लक्ष्मीबाई, HSRA के क्रांतिकारी भगत सिंह, किसान आंदोलनों और रियासतों के विलय वाले सरदार पटेल, कवयित्री और सत्याग्रही सरोजिनी नायडू जैसे लोग थे, और उनके साथ सैकड़ों और नाम। इस सूची में हर व्यक्ति की तिथियाँ, उनका काम, एक कम जाना तथ्य और पढ़ने लायक स्रोत है।
यह सूची कैसे बनाई गई
स्वतंत्रता संग्राम में तीन धाराएँ साथ चलीं: 1857 जैसे सशस्त्र विद्रोह, भगत सिंह और उनके साथियों जैसे क्रांतिकारी संगठन, और कांग्रेस के नेतृत्व वाले जन आंदोलन जैसे असहयोग, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो। इस सूची में हर धारा से लोग हैं। हर नाम के साथ हमने वे तथ्य दिए हैं जो मानक इतिहास ग्रंथों में मिलते हैं, और जहाँ कहानी परंपरा से आई है वहाँ यह बताया है।
पाँच व्यक्तियों पर हमारे पास अलग विस्तृत लेख और आवाज़ वाले पेज हैं; बाक़ी के बारे में संक्षेप में लिखा है ताकि आप आगे खोज सकें।
रानी लक्ष्मीबाई (जन्म 1828 या 1835, मृत्यु 1858)
झाँसी की रानी ने 1854 में अपने दत्तक पुत्र को उत्तराधिकारी न मानने और झाँसी के विलय का पहले क़ानूनी विरोध किया। 1857 के विद्रोह में उन्होंने झाँसी का शासन संभाला, मार्च 1858 में सर ह्यू रोज़ की सेना से क़िले की रक्षा की, फिर कालपी और ग्वालियर में लड़ीं और 17 जून 1858 को ग्वालियर के पास युद्ध में मारी गईं।
कम जाना तथ्य: उनके तोपख़ाने के प्रमुख ग़ौस ख़ाँ थे, और 1854 में उनसे मिले ऑस्ट्रेलियाई वकील जॉन लैंग का वर्णन ('Wanderings in India', 1859) उनका सबसे नज़दीकी आँखों देखा विवरण है। पढ़ें: रानी लक्ष्मीबाई की जीवनी।
1857 के दूसरे योद्धा
- मंगल पांडे: 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में अंग्रेज़ अधिकारियों पर हमला किया; 8 अप्रैल 1857 को फाँसी। उनकी घटना को अक्सर विद्रोह की शुरुआत माना जाता है, हालाँकि बड़ा विद्रोह 10 मई 1857 को मेरठ से फैला।
- तात्या टोपे: कानपुर, कालपी और ग्वालियर में लड़े, रानी लक्ष्मीबाई के साथी; लंबे गुरिल्ला अभियान के बाद पकड़े गए और 18 अप्रैल 1859 को शिवपुरी में फाँसी।
- बेगम हज़रत महल: अवध की बेगम, 1857 और 1858 में लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व किया; हार के बाद नेपाल चली गईं और 1879 में काठमांडू में निधन।
- कुँवर सिंह: बिहार के जगदीशपुर के लगभग 80 वर्षीय ज़मींदार, जिन्होंने 1857 और 1858 में अंग्रेज़ों से कई लड़ाइयाँ लड़ीं; अप्रैल 1858 में घावों से मृत्यु।
भगत सिंह (1907 से 1931)
पंजाब के क्रांतिकारी और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य। दिसंबर 1928 में लाहौर में पुलिस अधिकारी सॉन्डर्स की हत्या में शामिल थे, और 8 अप्रैल 1929 को बटुकेश्वर दत्त के साथ केंद्रीय असेंबली में बम फेंककर गिरफ़्तारी दी। 23 मार्च 1931 को राजगुरु और सुखदेव के साथ लाहौर जेल में फाँसी हुई।
कम जाना तथ्य: अदालत में 6 जून 1929 के बयान में उन्होंने कहा कि क्रांति 'बम और पिस्तौल का संप्रदाय नहीं' है, और जेल में 'मैं नास्तिक क्यों हूँ' (अक्टूबर 1930) लिखा। पढ़ें: भगत सिंह की जीवनी और भगत सिंह के विचार।
क्रांतिकारी आंदोलन के दूसरे साथी
- खुदीराम बोस: 18 साल की उम्र में मुज़फ़्फ़रपुर में एक अंग्रेज़ जज की गाड़ी पर बम फेंकने के आरोप में 11 अगस्त 1908 को फाँसी; बम से दो अंग्रेज़ महिलाएँ मारी गई थीं।
- करतार सिंह सराभा: ग़दर पार्टी के युवा सदस्य, 16 नवंबर 1915 को लाहौर में फाँसी; भगत सिंह उन्हें अपना आदर्श मानते थे।
- राम प्रसाद बिस्मिल और अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ: 9 अगस्त 1925 को काकोरी के पास ट्रेन से सरकारी ख़ज़ाना लूटने के मामले में दिसंबर 1927 में फाँसी। हिंदू मुस्लिम दोस्ती की मिसाल के रूप में दोनों को साथ याद किया जाता है।
- चंद्रशेखर आज़ाद: HSRA के सैन्य प्रमुख; 27 फ़रवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ़्रेड पार्क में पुलिस से घिरने पर मारे गए।
- बटुकेश्वर दत्त: असेंबली बम कांड में भगत सिंह के साथी; उम्रक़ैद के बाद अंडमान की सेलुलर जेल भेजे गए और 1965 में निधन।
- उधम सिंह: 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में जलियाँवाला बाग़ के समय पंजाब के लेफ़्टिनेंट गवर्नर रहे माइकल ओ'डायर की हत्या की; 31 जुलाई 1940 को फाँसी।
- दुर्गावती देवी (दुर्गा भाभी): दिसंबर 1928 में सॉन्डर्स की हत्या के बाद भगत सिंह को वेश बदलकर लाहौर से निकालने में मदद की।
एक बात ध्यान रखें: इन क्रांतिकारियों के कई कामों में लोगों की जान गई, और इतिहासकार राजनीतिक हिंसा पर बहस करते हैं। निबंध में घटनाएँ ईमानदारी से लिखें, उन्हें सजाकर नहीं।
सरदार पटेल (1875 से 1950)
गुजरात के बैरिस्टर, जिन्होंने 1918 में खेड़ा और 1928 में बारडोली के किसान आंदोलनों का नेतृत्व किया; बारडोली के बाद वे 'सरदार' कहलाए। आज़ादी के बाद उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में उन्होंने 500 से अधिक रियासतों का भारतीय संघ में विलय कराया।
कम जाना तथ्य: 21 अप्रैल 1947 को उन्होंने दिल्ली के मेटकाफ़ हाउस में प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित किया था, और इसी तारीख़ को आज सिविल सेवा दिवस मनाया जाता है। पढ़ें: सरदार पटेल की जीवनी और राष्ट्रीय एकता दिवस पर भाषण।
सरोजिनी नायडू (1879 से 1949)
कवयित्री और वक्ता, 'भारत कोकिला'। 1925 में कानपुर में कांग्रेस अध्यक्ष बनीं और 1930 के नमक सत्याग्रह में गुजरात के धरासना नमक कारख़ाने पर सत्याग्रह का नेतृत्व किया। 1947 में संयुक्त प्रांत की राज्यपाल बनकर किसी राज्य की पहली महिला राज्यपाल बनीं।
कम जाना तथ्य: धरासना पर 21 मई 1930 को अहिंसक सत्याग्रहियों की पिटाई का आँखों देखा वर्णन अमेरिकी पत्रकार वेब मिलर ने दुनिया भर में भेजा था। पढ़ें: सरोजिनी नायडू की जीवनी।
रवीन्द्रनाथ टैगोर: कलम से विरोध (1861 से 1941)
टैगोर हथियार उठाने वाले क्रांतिकारी नहीं थे, पर उनका विरोध इतिहास में दर्ज है। 1905 के बंग भंग के विरोध में उन्होंने गीत लिखे और राखी बंधन का आयोजन किया, और जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड के बाद मई 1919 में अंग्रेज़ों का दिया नाइटहुड लौटा दिया। भारत का राष्ट्रगान 'जन गण मन' उन्हीं का लिखा है। पढ़ें: रवीन्द्रनाथ टैगोर की जीवनी।
और महिलाएँ जिनके नाम कम लिए जाते हैं
- मातंगिनी हाज़रा: 73 वर्ष की उम्र में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 29 सितंबर 1942 को बंगाल के तमलुक में तिरंगा लेकर जुलूस का नेतृत्व करते हुए पुलिस की गोली से मारी गईं।
- कनकलता बरुआ: असम की 17 वर्षीय लड़की, 20 सितंबर 1942 को गोहपुर थाने पर तिरंगा फहराने की कोशिश में गोली से मारी गईं।
- अरुणा आसफ़ अली: 9 अगस्त 1942 को बंबई के गोवालिया टैंक मैदान में तिरंगा फहराया, जब बड़े नेता गिरफ़्तार हो चुके थे।
- उषा मेहता: 1942 में गुप्त 'कांग्रेस रेडियो' चलाया, जिससे आंदोलन की ख़बरें प्रसारित होती थीं।
समयरेखा: 1857 से 1947
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1857 | मेरठ से विद्रोह शुरू (10 मई); झाँसी, कानपुर, लखनऊ और दिल्ली में लड़ाई |
| 1858 | रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु; कंपनी का शासन ख़त्म, ब्रिटिश ताज का सीधा शासन |
| 1885 | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना |
| 1905 | बंगाल का विभाजन और स्वदेशी आंदोलन |
| 1908 | खुदीराम बोस को फाँसी |
| 1915 | ग़दर आंदोलन के बाद करतार सिंह सराभा को फाँसी |
| 1919 | जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड (13 अप्रैल); टैगोर ने नाइटहुड लौटाया |
| 1920 से 1922 | असहयोग आंदोलन |
| 1925 | काकोरी कांड; सरोजिनी नायडू कांग्रेस अध्यक्ष |
| 1928 | बारडोली सत्याग्रह; सॉन्डर्स की हत्या |
| 1929 | असेंबली बम कांड (8 अप्रैल) |
| 1930 | नमक सत्याग्रह; धरासना (21 मई) |
| 1931 | भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव को फाँसी (23 मार्च) |
| 1942 | भारत छोड़ो आंदोलन (8 और 9 अगस्त) |
| 1947 | 15 अगस्त को स्वतंत्रता; रियासतों का विलय शुरू |
प्रोजेक्ट के लिए स्रोत और आवाज़ में अभ्यास
किसी सेनानी पर प्रोजेक्ट करें तो उनके अपने शब्द खोजें: भगत सिंह के पर्चे और बयान, सरोजिनी नायडू के भाषण, टैगोर का 1919 का पत्र, संविधान सभा में पटेल के भाषण। सोशल मीडिया पर घूमने वाले बहुत से 'अनमोल वचन' बिना स्रोत के होते हैं।
अभ्यास के लिए Yuga ऐप में आप भगत सिंह, रानी लक्ष्मीबाई, सरदार पटेल या सरोजिनी नायडू के AI रूप से आवाज़ में बात कर सकते हैं। ये इतिहास के रिकॉर्ड पर बने AI पुनर्निर्माण हैं, असली लोग नहीं, और गलती कर सकते हैं; स्कूल के काम में मूल स्रोतों और किताबों का हवाला दें। इंटरव्यू के सवाल बनाने के लिए देखें इतिहास के व्यक्ति से इंटरव्यू प्रोजेक्ट।
लोग क्या पूछते हैं
- भारत के प्रमुख क्रांतिकारी कौन थे?
- प्रमुख क्रांतिकारियों में भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, राजगुरु, सुखदेव, बटुकेश्वर दत्त, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ, खुदीराम बोस, करतार सिंह सराभा और उधम सिंह के नाम आते हैं। 1857 के विद्रोह में रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, मंगल पांडे, बेगम हज़रत महल और कुँवर सिंह प्रमुख थे।
- भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फाँसी कब हुई?
- तीनों को 23 मार्च 1931 को लाहौर सेंट्रल जेल में फाँसी दी गई। उन्हें लाहौर षड्यंत्र केस में, यानी दिसंबर 1928 में पुलिस अधिकारी सॉन्डर्स की हत्या के मामले में, 7 अक्टूबर 1930 को मौत की सज़ा सुनाई गई थी। 23 मार्च को उनकी याद में शहीद दिवस मनाया जाता है।
- स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख महिला सेनानी कौन थीं?
- प्रमुख महिला सेनानियों में रानी लक्ष्मीबाई और बेगम हज़रत महल (1857), सरोजिनी नायडू (नमक सत्याग्रह, पहली महिला राज्यपाल), अरुणा आसफ़ अली, उषा मेहता, मातंगिनी हाज़रा, कनकलता बरुआ और दुर्गावती देवी के नाम आते हैं। इनमें से कई के बारे में स्थानीय इतिहास में और भी जानकारी मिलती है।
- 1857 के विद्रोह की शुरुआत कहाँ से हुई?
- 29 मार्च 1857 को बैरकपुर में मंगल पांडे ने अंग्रेज़ अधिकारियों पर हमला किया, पर बड़ा विद्रोह 10 मई 1857 को मेरठ छावनी से शुरू हुआ। वहाँ से सिपाही दिल्ली पहुँचे और विद्रोह कानपुर, लखनऊ, झाँसी और मध्य भारत तक फैल गया।
स्रोत
- Bipan Chandra and others, India's Struggle for Independence (1988)
- Sumit Sarkar, Modern India, 1885 to 1947 (1983)
- Bhagat Singh Internet Archive: पर्चे, बयान और पत्र
- Surendra Nath Sen, Eighteen Fifty-Seven (1957)
- Kama Maclean, A Revolutionary History of Interwar India: Violence, Image, Voice and Text (2015)