सीधे सामग्री पर जाएँ

सरोजिनी नायडू का जीवन परिचय

6 मिनट

सरोजिनी नायडू (13 फ़रवरी 1879 से 2 मार्च 1949) कवयित्री, प्रभावशाली वक्ता और स्वतंत्रता सेनानी थीं, जिन्हें 'भारत कोकिला' (Nightingale of India) कहा जाता है। उन्होंने अंग्रेज़ी में 'The Golden Threshold' (1905) जैसे कविता संग्रह लिखे, 1925 में कानपुर में कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं, 1930 के नमक सत्याग्रह में धरासना का नेतृत्व किया, और 1947 में संयुक्त प्रांत (आज का उत्तर प्रदेश) की राज्यपाल बनकर किसी भारतीय राज्य की पहली महिला राज्यपाल बनीं। उनका जन्मदिन राष्ट्रीय महिला दिवस है।

सरोजिनी नायडू के जीवन की मुख्य तिथियाँ

तिथिघटना
13 फ़रवरी 1879हैदराबाद में जन्म; पिता वैज्ञानिक अघोरनाथ चट्टोपाध्याय, माता कवयित्री वरदा सुंदरी देवी
1891लगभग 12 वर्ष की उम्र में मद्रास विश्वविद्यालय की मैट्रिक परीक्षा पास
1895 से 1898इंग्लैंड में किंग्स कॉलेज लंदन और गर्टन कॉलेज, कैम्ब्रिज में पढ़ाई
1898डॉ. मुथ्याला गोविंदराजुलु नायडू से अंतरजातीय विवाह
1905पहला कविता संग्रह 'The Golden Threshold'
1912'The Bird of Time'
1917'The Broken Wing'; महिलाओं के मताधिकार के लिए मॉन्टेग्यू से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में
दिसंबर 1925कानपुर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष
21 मई 1930नमक सत्याग्रह में धरासना नमक कारख़ाने पर सत्याग्रह का नेतृत्व
1931लंदन में दूसरे गोलमेज़ सम्मेलन में भाग
1942भारत छोड़ो आंदोलन में गिरफ़्तार
15 अगस्त 1947संयुक्त प्रांत की राज्यपाल, देश की पहली महिला राज्यपाल
2 मार्च 1949लखनऊ में पद पर रहते हुए निधन

बचपन: हैदराबाद का एक पढ़ा लिखा घर

सरोजिनी का जन्म हैदराबाद में एक बंगाली परिवार में हुआ। उनके पिता अघोरनाथ चट्टोपाध्याय एडिनबरा से विज्ञान में डॉक्टरेट थे और हैदराबाद के निज़ाम कॉलेज के संस्थापकों में थे; माँ वरदा सुंदरी देवी बांग्ला में कविता लिखती थीं। आठ भाई बहनों में उनके भाई वीरेंद्रनाथ क्रांतिकारी बने और हरींद्रनाथ कवि व अभिनेता।

वे बचपन से पढ़ाई में तेज़ थीं और लगभग 12 साल की उम्र में मैट्रिक पास कर ली। किशोर उम्र में उन्होंने फ़ारसी पृष्ठभूमि वाला एक लंबा नाटक 'माहेर मुनीर' लिखा। निज़ाम की छात्रवृत्ति से 1895 में वे इंग्लैंड गईं और किंग्स कॉलेज लंदन व कैम्ब्रिज के गर्टन कॉलेज में पढ़ीं।

इंग्लैंड में आलोचक एडमंड गॉस ने उन्हें सलाह दी कि वे अंग्रेज़ी कवियों की नक़ल करने के बजाय भारत के जीवन, लोगों और रंगों के बारे में लिखें। उनकी आगे की कविताओं में यही दिखता है।

कवयित्री सरोजिनी: 'भारत कोकिला' क्यों कहा गया

1898 में भारत लौटकर उन्होंने डॉ. गोविंदराजुलु नायडू से विवाह किया, जो दूसरी जाति के थे; उस समय यह बहुत असामान्य था। उनके तीन कविता संग्रह अंग्रेज़ी में छपे: 'The Golden Threshold' (1905, आर्थर साइमन्स की भूमिका के साथ), 'The Bird of Time' (1912) और 'The Broken Wing' (1917)। उनकी कविताएँ लयबद्ध और गेय हैं, इसलिए उन्हें 'भारत कोकिला' या 'Nightingale of India' कहा जाने लगा।

उनकी प्रसिद्ध कविता 'Palanquin Bearers' पालकी उठाने वालों के गीत की तरह चलती है:

“हल्के से, ओ हल्के से हम उसे ले चलते हैं, वह हमारे गीत की हवा में फूल सी झूलती है।”
'Palanquin Bearers', The Golden Threshold (1905), हिंदी अनुवाद. मूल अंग्रेज़ी: “Lightly, O lightly we bear her along, / She sways like a flower in the wind of our song;”

उसी संग्रह की 'Indian Weavers' में बुनकर सुबह शिशु के वस्त्र, शाम को रानी का घूँघट और रात को कफ़न बुनते हैं, यानी तीन पद्यों में जन्म, विवाह और मृत्यु। उनकी कविताएँ पढ़ने के लिए 'The Golden Threshold' Project Gutenberg पर मुफ़्त उपलब्ध है।

हैदराबाद में उनके परिवार का घर भी 'Golden Threshold' कहलाता था, जो आज हैदराबाद विश्वविद्यालय से जुड़ा है।

राजनीति में: वक्ता, कांग्रेस अध्यक्ष और सत्याग्रही

1905 के बंग भंग के बाद वे राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ीं और अपने भाषणों के लिए प्रसिद्ध हुईं। वे हिंदू मुस्लिम एकता, महिलाओं की शिक्षा और पर्दा व बाल विवाह के विरोध पर बोलती थीं। दिसंबर 1917 में उन्होंने भारत सचिव एडविन मॉन्टेग्यू से मिलने वाले महिलाओं के प्रतिनिधिमंडल में भाग लिया, जिसने महिलाओं के मताधिकार की माँग रखी।

दिसंबर 1925 में कानपुर अधिवेशन में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं। वे इस पद पर पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला थीं (उनसे पहले 1917 में ऐनी बेसेंट अध्यक्ष बनी थीं)।

1930 के नमक सत्याग्रह में वरिष्ठ नेताओं की गिरफ़्तारी के बाद उन्होंने गुजरात के धरासना नमक कारख़ाने पर सत्याग्रह का नेतृत्व संभाला। 21 मई 1930 को अहिंसक सत्याग्रहियों पर पुलिस ने लाठियाँ बरसाईं, जिसका आँखों देखा वर्णन अमेरिकी पत्रकार वेब मिलर ने दुनिया भर के अख़बारों में भेजा। सरोजिनी ने स्वयंसेवकों से बिना पलटवार किए चोट सहने को कहा। 1931 में वे लंदन के दूसरे गोलमेज़ सम्मेलन में गईं और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में जेल गईं।

पहली महिला राज्यपाल और राष्ट्रीय महिला दिवस

15 अगस्त 1947 को वे संयुक्त प्रांत (United Provinces, जो 1950 में उत्तर प्रदेश बना) की राज्यपाल बनीं। वे किसी भारतीय राज्य की पहली महिला राज्यपाल थीं। 2 मार्च 1949 को लखनऊ के राजभवन में, पद पर रहते हुए, उनका निधन हुआ। उनकी बेटी पद्मजा नायडू बाद में पश्चिम बंगाल की राज्यपाल बनीं।

भारत में उनका जन्मदिन 13 फ़रवरी राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन स्कूलों में उनकी कविताओं का पाठ और महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों पर चर्चा अच्छी गतिविधियाँ हैं।

उनके नारीवाद की सीमाओं पर भी इतिहासकार लिखते हैं: उन्होंने महिलाओं के मताधिकार और शिक्षा की माँग की, पर कई बार ख़ुद को 'नारीवादी' कहलाने से दूर रखा। निबंध में उनके अपने भाषणों के आधार पर लिखना सबसे सुरक्षित है ('Speeches and Writings of Sarojini Naidu', 1918)।

अगर आप उनसे पूछना चाहते हैं कि धरासना के दिन क्या हुआ, तो Yuga ऐप में सरोजिनी नायडू के AI रूप से आवाज़ में बात कर सकते हैं। यह उनकी कविताओं, भाषणों और इतिहास के रिकॉर्ड पर बना एक AI पुनर्निर्माण है, असली सरोजिनी नायडू नहीं, और इसमें गलती हो सकती है; प्रोजेक्ट में उनकी किताबों और भाषणों का हवाला दें। उस दौर के दूसरे नेताओं के लिए पढ़ें स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी और भारत की महान रानियाँ।

लोग क्या पूछते हैं

सरोजिनी नायडू को भारत कोकिला क्यों कहा जाता है?
सरोजिनी नायडू की अंग्रेज़ी कविताएँ बहुत लयबद्ध और गाने लायक थीं, और वे भारत के लोगों, त्योहारों और कामों को गीत की तरह लिखती थीं। इसी वजह से उन्हें 'भारत कोकिला' या 'Nightingale of India' कहा जाने लगा। उनके संग्रह 'The Golden Threshold' (1905), 'The Bird of Time' (1912) और 'The Broken Wing' (1917) हैं।
राष्ट्रीय महिला दिवस कब मनाया जाता है?
भारत में राष्ट्रीय महिला दिवस 13 फ़रवरी को मनाया जाता है, जो सरोजिनी नायडू का जन्मदिन है। उनका जन्म 13 फ़रवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था। यह अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) से अलग है।
भारत की पहली महिला राज्यपाल कौन थीं?
सरोजिनी नायडू भारत के किसी राज्य की पहली महिला राज्यपाल थीं। वे 15 अगस्त 1947 को संयुक्त प्रांत की राज्यपाल बनीं, जो 1950 में उत्तर प्रदेश कहलाया। 2 मार्च 1949 को लखनऊ में पद पर रहते हुए उनका निधन हुआ।
सरोजिनी नायडू कांग्रेस की अध्यक्ष कब बनीं?
सरोजिनी नायडू दिसंबर 1925 में कानपुर अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं। वे इस पद पर पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला थीं। उनसे पहले 1917 में ऐनी बेसेंट कांग्रेस की अध्यक्ष बनी थीं, जो जन्म से आयरिश थीं।

स्रोत