सीधे सामग्री पर जाएँ

भारत की महान रानियाँ जिन्होंने राज किया

6 मिनट

भारत के इतिहास में कई रानियों ने अपने अधिकार से या नाबालिग बेटे की संरक्षक के रूप में राज किया। तीन सबसे चर्चित उदाहरण हैं: रज़िया सुल्तान, जिन्होंने 1236 से 1240 तक दिल्ली सल्तनत पर राज किया; रुद्रमा देवी, जो लगभग 1262 से 1289 तक काकतीय राज्य की शासक रहीं; और झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, जिन्होंने 1857 के विद्रोह में झाँसी की रक्षा की और जून 1858 में ग्वालियर के पास लड़ते हुए मारी गईं।

यह सूची कैसे बनाई गई

इस लेख में केवल उन रानियों को रखा गया है जिन्होंने सच में शासन किया: अपने नाम से, या बेटे की संरक्षक (रीजेंट) के रूप में सत्ता अपने हाथ में रखकर। केवल राजा की पत्नी होना या प्रसिद्ध होना काफ़ी नहीं माना गया। हर नाम के साथ तिथियाँ, एक ऐसा तथ्य जो अक्सर छूट जाता है, और मुख्य स्रोत दिया गया है।

तीन रानियों का विस्तार से परिचय है, जिनके बारे में हमारे अलग लेख भी हैं। उसके बाद दूसरी शासक रानियों की एक छोटी तालिका है। जहाँ इतिहास और किंवदंती में फ़र्क़ है, वहाँ उसे साफ़ लिखा गया है।

रज़िया सुल्तान: दिल्ली सल्तनत की अकेली महिला शासक

रज़िया (जन्म लगभग 1205, मृत्यु 1240) सुल्तान इल्तुतमिश की बेटी थीं। पिता ने उन्हें उत्तराधिकारी चुना था, पर उनकी मृत्यु के बाद अमीरों ने उनके भाई को गद्दी दी। नवंबर 1236 में भाई को हटाकर रज़िया सुल्तान बनीं और 1240 तक राज किया।

जो बात अक्सर छूट जाती है: रज़िया ने “सुल्ताना” नहीं, “सुल्तान” की उपाधि ली और अपने नाम के सिक्के चलवाए, जो आज भी मिलते हैं। समकालीन इतिहासकार मिनहाज-उस-सिराज (तबक़ात-ए-नासिरी) के अनुसार उन्होंने पर्दा छोड़कर कोट और टोपी पहनी और हाथी पर सवार होकर सेना के आगे चलीं। तुर्क अमीरों के विरोध के बाद वे 1240 में हटाई गईं और अक्टूबर 1240 में कैथल के पास उनकी हत्या हुई। पूरा परिचय: रज़िया सुल्तान की जीवनी।

रुद्रमा देवी: काकतीय राज्य की शासक

रुद्रमा देवी (जन्म लगभग 1245, मृत्यु 1289) काकतीय राजा गणपतिदेव की बेटी थीं। बेटा न होने के कारण पिता ने उन्हें उत्तराधिकारी बनाया, और लगभग 1262 से उन्होंने ओरुगल्लु (वारंगल) से राज किया। उन्होंने देवगिरि के यादवों का आक्रमण रोका और अपने नाती प्रतापरुद्र को उत्तराधिकारी तैयार किया।

जो बात अक्सर छूट जाती है: उनके शिलालेख उन्हें “रुद्रदेव महाराज” कहते हैं, यानी पुरुष राजा का नाम। वेनिस के यात्री मार्को पोलो ने मोटुपल्ली बंदरगाह वाले राज्य की एक न्यायप्रिय रानी का वर्णन किया, जिसे परंपरा रुद्रमा मानती है; पर चंदुपटला शिलालेख उनकी मृत्यु 1289 में बताता है और पोलो लगभग 1292 में आए, इसलिए यह पहचान बहस का विषय है। पूरा परिचय: रुद्रमा देवी की जीवनी।

रानी लक्ष्मीबाई: 1857 में झाँसी की रक्षा

लक्ष्मीबाई का बचपन का नाम मणिकर्णिका था। उनका जन्म वाराणसी में हुआ; परंपरागत तिथि 19 नवंबर 1828 है, पर कुछ विद्वान 1835 बताते हैं। लगभग चौदह साल की उम्र में उनका विवाह झाँसी के राजा गंगाधर राव नेवालकर से हुआ। 1853 में राजा ने मृत्यु से एक दिन पहले दामोदर राव को गोद लिया, पर ईस्ट इंडिया कंपनी ने गोद को मान्यता नहीं दी और 1854 में “व्यपगत के सिद्धांत” (डॉक्ट्रिन ऑफ़ लैप्स) के तहत झाँसी को अपने राज्य में मिला लिया।

रानी ने इसके ख़िलाफ़ क़ानूनी अपीलें भेजीं। 1857 के विद्रोह में जून में झाँसी में अंग्रेज़ अफ़सरों और उनके परिवारों की हत्या हुई; रानी ने अंग्रेज़ कमिश्नर को लिखे पत्रों में कहा कि विद्रोही सिपाहियों ने उन्हें मजबूर किया और उन्होंने हत्याओं का आदेश नहीं दिया। उनकी भूमिका पर इतिहासकारों में बहस है। मार्च 1858 में उन्होंने सर ह्यू रोज़ की सेना से झाँसी की रक्षा की, किला गिरने पर कालपी गईं, तात्या टोपे के साथ ग्वालियर पर क़ब्ज़ा किया, और 17 या 18 जून 1858 को ग्वालियर के पास लड़ते हुए मारी गईं।

जो बात अक्सर छूट जाती है: झाँसी की घेराबंदी का आँखों देखा वर्णन विष्णुभट गोडसे की मराठी पुस्तक माझा प्रवास में है, और उनकी सेना में ग़ौस ख़ाँ जैसे मुस्लिम तोपची भी थे। उनके अपने पत्र भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार में हैं।

तीनों रानियों की तुलना

रज़िया सुल्तानरुद्रमा देवीरानी लक्ष्मीबाई
समय1236 से 1240 तक शासनलगभग 1262 से 12891853 से 1858 (झाँसी)
राज्यदिल्ली सल्तनतकाकतीय राज्य, वारंगलझाँसी रियासत
उपाधिसुल्तानरुद्रदेव महाराजरानी, दामोदर राव की संरक्षक
मुख्य चुनौतीतुर्क अमीरों का विरोधपड़ोसी राज्य और सामंतों के विद्रोहकंपनी का क़ब्ज़ा और 1858 का युद्ध
अंत1240 में कैथल के पास हत्या1289 में मृत्युजून 1858 में युद्ध में मृत्यु
मुख्य स्रोततबक़ात-ए-नासिरी, सिक्केशिलालेख, मार्को पोलोउनके पत्र, गोडसे, ब्रिटिश रिपोर्टें

भारत की दूसरी शासक रानियाँ: एक छोटी तालिका

नीचे कुछ और रानियाँ हैं जिन्होंने अपने अधिकार से या संरक्षक के रूप में शासन किया। हर एक के बारे में और पढ़ने के लिए दिए गए स्रोत देखें।

नामसमय और राज्यएक तथ्य
प्रभावतीगुप्तालगभग चौथी सदी के अंत से, वाकाटक राज्य (दक्कन)गुप्त सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय की बेटी; पति की मृत्यु के बाद बेटों की संरक्षक के रूप में राज किया; उनके ताम्रपत्र दान मिले हैं
दिद्दा980 से 1003, कश्मीरपहले संरक्षक और फिर अपने नाम से शासक; कल्हण की राजतरंगिणी में उनका विस्तृत, आलोचनात्मक वर्णन है
नायकी देवीबारहवीं सदी, चालुक्य (सोलंकी) राज्य, गुजरातबेटे मूलराज द्वितीय की संरक्षक; 1178 में कासहृद में मुहम्मद ग़ोरी की सेना की हार उन्हीं के शासन में हुई
रानी दुर्गावतीसोलहवीं सदी, गोंडवाना (गढ़ा मंडला)पति की मृत्यु के बाद बेटे की संरक्षक; 1564 में मुग़ल सेनापति आसफ़ ख़ाँ से लड़ते हुए मृत्यु
रानी अब्बक्का चौटासोलहवीं सदी, उल्लाल (कर्नाटक तट)पुर्तगालियों के ख़िलाफ़ संघर्ष के लिए जानी जाती हैं; विवरण का बड़ा हिस्सा लोक परंपरा से आता है
वेलु नाचियारअठारहवीं सदी, शिवगंगा (तमिलनाडु)1780 के आसपास हैदर अली की सहायता से अपना राज्य वापस लिया
कित्तूर रानी चेन्नम्मा1824, कित्तूर (कर्नाटक)गोद लिए बेटे के अधिकार के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी से लड़ीं; बंदी बनाई गईं और 1829 में क़ैद में मृत्यु

इस तालिका की कुछ रानियों के बारे में लोकप्रिय कहानियाँ इतिहास से काफ़ी आगे निकल गई हैं, ख़ासकर अब्बक्का और नायकी देवी के मामले में। प्रोजेक्ट में उन्हें शामिल करें तो स्रोत ज़रूर जाँचें।

स्कूल प्रोजेक्ट के लिए सुझाव

एक अच्छा प्रोजेक्ट तीन रानियों की तुलना है, ऊपर जैसी तालिका से शुरू करके। हर रानी के लिए एक प्राथमिक स्रोत (सिक्का, शिलालेख, पत्र) और एक सवाल रखें जिसका जवाब इतिहासकार अब भी खोज रहे हैं। इंटरव्यू प्रोजेक्ट का तरीका इस गाइड में है।

आप Yuga ऐप में रज़िया सुल्तान, रुद्रमा देवी और रानी लक्ष्मीबाई से आवाज़ या टेक्स्ट में सवाल पूछने का अभ्यास कर सकते हैं। ये ऐतिहासिक स्रोतों से बने AI पुनर्निर्माण हैं, असली रानियाँ नहीं, और ग़लती कर सकते हैं। प्रोजेक्ट में ऐप को नहीं, मूल स्रोतों को उद्धृत करें।

लोग क्या पूछते हैं

भारत की पहली महिला शासक कौन थीं?
दिल्ली सल्तनत की पहली और अकेली महिला शासक रज़िया सुल्तान थीं, जिन्होंने 1236 से 1240 तक राज किया। पर पूरे भारत में उनसे पहले भी महिलाओं ने शासन किया, जैसे वाकाटक राज्य की संरक्षक प्रभावतीगुप्ता (चौथी सदी के अंत) और कश्मीर की दिद्दा (980 से 1003)।
रानी लक्ष्मीबाई का जन्म कब हुआ?
परंपरागत तिथि 19 नवंबर 1828 है और जन्मस्थान वाराणसी। कुछ इतिहासकार उनका जन्म 1835 के आसपास मानते हैं, क्योंकि पक्का जन्म रिकॉर्ड नहीं मिलता। उनका बचपन का नाम मणिकर्णिका था और उनकी मृत्यु 17 या 18 जून 1858 को ग्वालियर के पास युद्ध में हुई।
रुद्रमा देवी और रज़िया सुल्तान में क्या समानता है?
दोनों तेरहवीं सदी में राज करने वाली महिलाएँ थीं, दोनों को पिता ने उत्तराधिकारी चुना क्योंकि योग्य बेटा नहीं था या बेटे योग्य नहीं माने गए, और दोनों ने पुरुष उपाधि अपनाई: रज़िया ने सुल्तान और रुद्रमा ने रुद्रदेव महाराज। फ़र्क़ यह है कि रुद्रमा लगभग 27 साल राज कर सकीं, रज़िया केवल साढ़े तीन साल।
व्यपगत का सिद्धांत क्या था?
व्यपगत का सिद्धांत (डॉक्ट्रिन ऑफ़ लैप्स) ईस्ट इंडिया कंपनी की नीति थी, जिसके तहत किसी आश्रित रियासत का राजा बिना जैविक पुत्र के मरता तो कंपनी गोद लिए बेटे को उत्तराधिकारी न मानकर रियासत अपने राज्य में मिला लेती थी। 1854 में झाँसी को इसी के तहत मिलाया गया।

स्रोत

  • तबक़ात-ए-नासिरी, मिनहाज-उस-सिराज जुज़जानी; अंग्रेज़ी अनुवाद H. G. Raverty
  • The Kakatiyas of Warangal, P. V. Parabrahma Sastry, 1978
  • माझा प्रवास, विष्णुभट गोडसे (लिखा 1884, छपा 1907)
  • The Rani of Jhansi: A Study in Female Heroism in India, Joyce Lebra-Chaudhuri, 1986
  • राजतरंगिणी, कल्हण; अंग्रेज़ी अनुवाद M. A. Stein, 1900
  • A History of Ancient and Early Medieval India, Upinder Singh, 2008