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रानी लक्ष्मीबाई जयंती पर भाषण

6 मिनट

रानी लक्ष्मीबाई की जयंती 19 नवंबर को मनाई जाती है। यह तारीख़ परंपरा से आई है; जन्म वर्ष पर मतभेद है, ज़्यादातर किताबें 1828 लिखती हैं और कुछ इतिहासकार 1835 मानते हैं। इस पेज पर छात्रों के लिए 2 से 3 मिनट का पूरा भाषण, 1 मिनट का छोटा भाषण, 10 पंक्तियाँ और भाषण में बोलने लायक पक्के तथ्य हैं: 1854 में झाँसी का विलय, 1858 की घेराबंदी और ग्वालियर में मृत्यु।

19 नवंबर और जन्म वर्ष का मतभेद

रानी लक्ष्मीबाई का जन्म वाराणसी में हुआ था और उनका बचपन का नाम मणिकर्णिका था। जयंती की तारीख़ 19 नवंबर परंपरा से चली आ रही है। साल को लेकर दो मत हैं: पाठ्यपुस्तकों में आम तौर पर 1828 लिखा मिलता है, जबकि कुछ इतिहासकार उस समय के दस्तावेज़ों में दर्ज उम्र के आधार पर 1835 के आसपास का साल मानते हैं।

भाषण में इसे सरल ढंग से कह सकते हैं: 'उनका जन्म 19 नवंबर को वाराणसी में हुआ; ज़्यादातर किताबें 1828 बताती हैं।' इससे आप सही भी रहेंगे और श्रोता उलझेंगे भी नहीं। पूरी कहानी के लिए पढ़ें रानी लक्ष्मीबाई की जीवनी।

2 से 3 मिनट का पूरा भाषण

आराम से बोलने पर यह भाषण लगभग ढाई मिनट का है।

आदरणीय प्रधानाचार्य जी, सभी शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियो, आज 19 नवंबर है, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की जयंती। उनका नाम सुनते ही घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार लिए एक रानी की तस्वीर आँखों के सामने आ जाती है। आज मैं उस तस्वीर के पीछे की असली कहानी बताना चाहता हूँ।

रानी लक्ष्मीबाई का जन्म वाराणसी में हुआ था। उनका नाम मणिकर्णिका था और प्यार से लोग उन्हें मनु कहते थे। ज़्यादातर किताबें उनका जन्म 1828 में बताती हैं। उनका बचपन बिठूर में बीता, जहाँ उन्होंने घुड़सवारी और हथियार चलाना सीखा। 1842 में उनका विवाह झाँसी के राजा गंगाधर राव से हुआ और वे लक्ष्मीबाई कहलाईं।

उनके अपने बेटे की बचपन में ही मृत्यु हो गई। 1853 में राजा ने दामोदर राव को गोद लिया और अगले ही दिन उनका निधन हो गया। उस समय अंग्रेज़ ईस्ट इंडिया कंपनी की नीति थी कि दत्तक पुत्र को वारिस नहीं माना जाएगा। इसी नीति के सहारे 1854 में कंपनी ने झाँसी को अपने राज्य में मिला लिया। रानी ने पहले क़ानूनी रास्ता अपनाया, आवेदन भेजे और वकील के ज़रिए अपना पक्ष रखा।

1857 में देश के कई हिस्सों में विद्रोह भड़का और झाँसी का शासन रानी के हाथ में आया। मार्च 1858 में अंग्रेज़ सेनापति सर ह्यू रोज़ ने झाँसी को घेर लिया। रानी ने हार मानने से इनकार किया। क़िले की रक्षा में सिपाहियों के साथ स्त्रियाँ भी गोला बारूद और पानी पहुँचाती थीं, और उनके तोपख़ाने के प्रमुख ग़ौस ख़ाँ थे। जब झाँसी हार गई, तो रानी रात में अपने बेटे के साथ निकलकर कालपी पहुँचीं और फिर तात्या टोपे के साथ ग्वालियर पर क़ब्ज़ा किया।

17 जून 1858 को ग्वालियर के पास अंग्रेज़ घुड़सवारों से लड़ते हुए वे घायल होकर वीरगति को प्राप्त हुईं। तब उनकी उम्र तीस साल से भी कम थी।

साथियो, रानी लक्ष्मीबाई से हम यह सीख सकते हैं कि अपने हक़ के लिए पहले नियम और तर्क से लड़ना चाहिए, और जब ज़रूरत हो तो डर के बिना डटे रहना चाहिए। उन्होंने उस दौर में नेतृत्व किया जब औरतों को परदे के पीछे रखा जाता था। आज उनकी जयंती पर हम संकल्प लें कि हम किसी को भी लड़की होने के कारण कमज़ोर नहीं समझेंगे। धन्यवाद, जय हिंद।

छात्राएँ 'बताना चाहता हूँ' की जगह 'बताना चाहती हूँ' बोलें।

1 मिनट का छोटा भाषण

आदरणीय शिक्षकगण और मेरे साथियो, आज झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की जयंती है। उनका जन्म वाराणसी में हुआ और बचपन का नाम मणिकर्णिका था। 1842 में वे झाँसी की रानी बनीं। 1854 में अंग्रेज़ कंपनी ने उनके दत्तक पुत्र को वारिस मानने से इनकार करके झाँसी छीन ली। 1857 के विद्रोह में रानी ने झाँसी का शासन संभाला, और मार्च 1858 में अंग्रेज़ सेना के घेरे के सामने क़िले की रक्षा की। झाँसी गिरने के बाद वे कालपी और ग्वालियर में लड़ती रहीं और जून 1858 में युद्ध में मारी गईं। उनका साहस आज भी हमें अन्याय के सामने खड़े होने की हिम्मत देता है। धन्यवाद।

रानी लक्ष्मीबाई पर 10 पंक्तियाँ

  1. रानी लक्ष्मीबाई का जन्म वाराणसी में हुआ; जयंती 19 नवंबर को मनाई जाती है।
  2. उनका बचपन का नाम मणिकर्णिका और घर का नाम मनु था।
  3. पिता मोरोपंत तांबे थे और उनका बचपन बिठूर में बीता।
  4. 1842 में उनका विवाह झाँसी के राजा गंगाधर राव से हुआ।
  5. 1853 में दामोदर राव को गोद लिया गया।
  6. 1854 में कंपनी ने व्यपगत के सिद्धांत से झाँसी को हड़प लिया।
  7. 1857 के विद्रोह में उन्होंने झाँसी का शासन संभाला।
  8. मार्च और अप्रैल 1858 में उन्होंने सर ह्यू रोज़ की सेना से झाँसी की रक्षा की।
  9. वे तात्या टोपे के साथ कालपी और ग्वालियर में लड़ीं।
  10. 17 जून 1858 को ग्वालियर के पास युद्ध में उनकी मृत्यु हुई।

भाषण में सही बोलने लायक तथ्य

तथ्यक्या बोलें
जन्मवाराणसी; 19 नवंबर (परंपरा); वर्ष 1828, कुछ इतिहासकार 1835
विवाह1842, राजा गंगाधर राव नेवालकर
झाँसी का विलयमार्च 1854, व्यपगत का सिद्धांत (लॉर्ड डलहौज़ी)
घेराबंदी23 मार्च 1858 से; 3 और 4 अप्रैल को शहर पर हमला
ग्वालियर1 जून 1858 को क़ब्ज़ा
मृत्यु17 जून 1858 (कुछ स्रोत 18 जून), कोटा की सराय, ग्वालियर के पास

दो बातों में सावधानी रखें। पहली, 'मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी' परंपरा का वाक्य है, किसी दस्तावेज़ में शब्दशः नहीं मिलता; बोलें तो 'कहा जाता है' जोड़ें। दूसरी, बेटे को पीठ पर बाँधकर लड़ने वाली छवि भी परंपरा की है। भाषण में इनके बिना भी पूरी बात असरदार बनती है।

सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता 'झाँसी की रानी' (1930) की कुछ पंक्तियों से भाषण शुरू या ख़त्म करना स्कूलों में आम है। अगर ऐसा करें, तो कवयित्री का नाम ज़रूर बोलें।

तैयारी के सुझाव

  • भाषण को घड़ी देखकर दो बार ज़ोर से बोलें; 1 मिनट में लगभग 110 से 130 शब्द आते हैं।
  • तारीख़ों वाली पंक्तियाँ धीरे बोलें, बाक़ी कहानी की तरह।
  • अंत में एक ऐसा संकल्प रखें जो कक्षा सच में निभा सके।

अभ्यास के लिए आप Yuga ऐप में रानी लक्ष्मीबाई से आवाज़ में बात करके उनसे झाँसी की घेराबंदी के बारे में पूछ सकते हैं। यह इतिहास के स्रोतों पर बना एक AI पुनर्निर्माण है, असली रानी नहीं, और इससे गलती हो सकती है; भाषण के तथ्य किताबों से जाँच लें। दूसरी वीर रानियों के लिए देखें भारत की महान रानियाँ।

लोग क्या पूछते हैं

रानी लक्ष्मीबाई की जयंती कब मनाई जाती है?
रानी लक्ष्मीबाई की जयंती हर साल 19 नवंबर को मनाई जाती है। यह तारीख़ परंपरा से आई है। जन्म वर्ष पर मतभेद है: ज़्यादातर पाठ्यपुस्तकें 1828 लिखती हैं, जबकि कुछ इतिहासकार 1835 के आसपास मानते हैं। उनकी पुण्यतिथि 17 या 18 जून को याद की जाती है।
1 मिनट के भाषण में रानी लक्ष्मीबाई के बारे में क्या बोलें?
चार बातें रखें: वाराणसी में जन्म और बचपन का नाम मणिकर्णिका, 1854 में दत्तक पुत्र को न मानकर झाँसी का विलय, 1858 में झाँसी की रक्षा, और जून 1858 में ग्वालियर के पास युद्ध में मृत्यु। अंत में साहस या बराबरी पर एक छोटा संकल्प जोड़ें।
रानी लक्ष्मीबाई के बेटे का क्या हुआ?
दत्तक पुत्र दामोदर राव झाँसी से रानी के साथ निकले थे और उनकी मृत्यु के बाद बच गए। बाद में उन्होंने अंग्रेज़ सरकार के सामने समर्पण किया और उन्हें एक छोटी पेंशन मिली। वे इंदौर में रहे और 1906 में उनका निधन हुआ।
रानी लक्ष्मीबाई पर कौन सी कविता प्रसिद्ध है?
सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता 'झाँसी की रानी' (1930) सबसे प्रसिद्ध है और पीढ़ियों से स्कूलों में पढ़ाई जाती है। यह कविता है, इतिहास की किताब नहीं, इसलिए इसमें कुछ बातें काव्य रूप में कही गई हैं। भाषण में इसकी पंक्तियाँ लें तो कवयित्री का नाम ज़रूर बोलें।

स्रोत

  • John Lang, Wanderings in India and Other Sketches of Life in Hindostan (1859)
  • विष्णुभट गोडसे, माझा प्रवास (1907)
  • Joyce Lebra-Chaudhuri, The Rani of Jhansi: A Study in Female Heroism in India (1986)
  • Harleen Singh, The Rani of Jhansi: Gender, History, and Fable in India (2014)