सावित्रीबाई फुले जयंती पर भाषण
6 मिनट
सावित्रीबाई फुले जयंती हर साल 3 जनवरी को मनाई जाती है; उनका जन्म 3 जनवरी 1831 को सतारा ज़िले के नायगाँव में हुआ था। इस पेज पर स्कूल के लिए 2 से 3 मिनट का पूरा भाषण, 1 मिनट का छोटा भाषण, 10 आसान पंक्तियाँ और वे तथ्य हैं जो भाषण में सही सही बोलने चाहिए: जनवरी 1848 का पुणे का कन्या विद्यालय, 1863 का विधवा आश्रय और 1897 का प्लेग।
3 जनवरी को सावित्रीबाई फुले जयंती क्यों मनाते हैं
3 जनवरी 1831 को सावित्रीबाई फुले का जन्म हुआ था। उन्होंने पति जोतीराव फुले के साथ जनवरी 1848 में पुणे के भिड़े वाड़ा में लड़कियों का स्कूल शुरू किया और उसमें ख़ुद पढ़ाया, ऐसे समय में जब लड़कियों और दलितों की पढ़ाई का खुला विरोध होता था। इसीलिए स्कूलों में यह दिन लड़कियों की शिक्षा और बराबरी के विषय पर मनाया जाता है। महाराष्ट्र में 3 जनवरी को बालिका दिन के रूप में भी मनाया जाता है।
उनका पूरा जीवन परिचय पढ़ना हो तो देखें सावित्रीबाई फुले की जीवनी।
2 से 3 मिनट का पूरा भाषण
सामान्य गति से बोलने पर यह भाषण लगभग ढाई मिनट का है।
आदरणीय प्रधानाचार्य जी, सभी शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियो, आज 3 जनवरी है, सावित्रीबाई फुले की जयंती। आज मैं उस महिला के बारे में बोलना चाहती हूँ जिनकी वजह से आज इस कक्षा में इतनी लड़कियाँ बैठी हैं।
सावित्रीबाई का जन्म 1831 में महाराष्ट्र के नायगाँव में एक किसान परिवार में हुआ। लगभग नौ साल की उम्र में उनकी शादी जोतीराव फुले से हुई। उस समय उन्हें पढ़ना नहीं आता था। जोतीराव ने उन्हें घर पर पढ़ाया और फिर उन्होंने शिक्षक बनने का प्रशिक्षण लिया।
जनवरी 1848 में, जब वे केवल सत्रह साल की थीं, उन्होंने और जोतीराव ने पुणे में लड़कियों का स्कूल खोला। सावित्रीबाई उसकी शिक्षिका बनीं। उनकी जीवनियों में लिखा है कि रास्ते में लोग उन पर कीचड़ फेंकते थे, इसलिए वे एक अतिरिक्त साड़ी साथ ले जाती थीं और स्कूल पहुँचकर बदल लेती थीं। उन्होंने पढ़ाना नहीं छोड़ा। कुछ ही सालों में फुले दंपति ने पुणे में कई स्कूल खोले, जिनमें उन बच्चों के स्कूल भी थे जिन्हें तब अछूत कहकर दूर रखा जाता था।
सावित्रीबाई ने केवल पढ़ाया ही नहीं। 1863 में उन्होंने अपने घर में उन विधवा स्त्रियों के लिए आश्रय खोला जो समाज के डर से अकेली पड़ जाती थीं। उन्होंने एक विधवा के बेटे यशवंत को गोद लिया और उसे डॉक्टर बनाया। 1854 में उनका कविता संग्रह 'काव्यफुले' छपा, जिसमें वे बार बार कहती हैं कि अज्ञान से निकलने का रास्ता शिक्षा है।
1897 में पुणे में प्लेग फैला। सावित्रीबाई और उनके बेटे ने रोगियों के लिए क्लिनिक चलाया। रोगियों की सेवा करते हुए वे ख़ुद बीमार हो गईं और 10 मार्च 1897 को उनका निधन हो गया।
साथियो, सावित्रीबाई की कहानी हमें बताती है कि बदलाव अपने आप नहीं आता; किसी को कीचड़ सहकर भी रोज़ स्कूल जाना पड़ता है। आज हम उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि तब देंगे जब हम पढ़ाई को गंभीरता से लें, और किसी भी बच्चे को उसकी जाति, धर्म या लड़की होने के कारण पीछे न छूटने दें। धन्यवाद।
लड़के यह भाषण दें तो 'बोलना चाहती हूँ' की जगह 'बोलना चाहता हूँ' कर लें।
1 मिनट का छोटा भाषण
आदरणीय शिक्षकगण और मेरे साथियो, आज सावित्रीबाई फुले की जयंती है। उनका जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के नायगाँव में हुआ था। पति जोतीराव फुले ने उन्हें पढ़ना सिखाया, और जनवरी 1848 में दोनों ने पुणे में लड़कियों का स्कूल खोला, जहाँ सावित्रीबाई ने पढ़ाया। लोगों ने उनका विरोध किया, उन पर कीचड़ तक फेंका, पर वे रोज़ स्कूल जाती रहीं। उन्होंने विधवा स्त्रियों के लिए आश्रय खोला और कविताएँ लिखीं। 1897 में प्लेग के रोगियों की सेवा करते हुए उनका निधन हुआ। आइए, आज संकल्प लें कि हम ख़ुद भी पढ़ेंगे और दूसरों की पढ़ाई में भी मदद करेंगे। धन्यवाद।
सावित्रीबाई फुले पर 10 आसान पंक्तियाँ
- सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को सतारा ज़िले के नायगाँव में हुआ।
- लगभग नौ वर्ष की उम्र में उनका विवाह जोतीराव फुले से हुआ।
- जोतीराव ने उन्हें पढ़ना लिखना सिखाया।
- जनवरी 1848 में उन्होंने पुणे के भिड़े वाड़ा में लड़कियों के स्कूल में पढ़ाना शुरू किया।
- उन्हें भारत की शुरुआती महिला शिक्षिकाओं में गिना जाता है।
- उन्होंने दलित बच्चों के लिए भी स्कूल चलाए।
- 1863 में उन्होंने गर्भवती विधवाओं के लिए आश्रय खोला।
- 1854 में उनका कविता संग्रह 'काव्यफुले' प्रकाशित हुआ।
- वे सत्यशोधक समाज के काम में सक्रिय रहीं।
- 10 मार्च 1897 को प्लेग रोगियों की सेवा करते हुए उनका निधन हुआ।
भाषण में बोलने लायक तथ्य और तारीख़ें
| तारीख़ | तथ्य |
|---|---|
| 3 जनवरी 1831 | नायगाँव, सतारा में जन्म |
| जनवरी 1848 | पुणे के भिड़े वाड़ा में कन्या विद्यालय |
| 1854 | कविता संग्रह 'काव्यफुले' |
| 1863 | बालहत्या प्रतिबंधक गृह (विधवाओं और नवजातों का आश्रय) |
| 24 सितंबर 1873 | सत्यशोधक समाज की स्थापना |
| 1892 | 'बावनकशी सुबोध रत्नाकर' |
| 10 मार्च 1897 | पुणे में निधन |
| 2014 | पुणे विश्वविद्यालय का नाम सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय हुआ |
सावधानी: इंटरनेट पर सावित्रीबाई के नाम से कई 'अनमोल वचन' मिलते हैं जिनका स्रोत नहीं होता। भाषण में उनकी बात रखनी हो तो कहें कि 'काव्यफुले' की कविताओं में वे शिक्षा को अज्ञान से मुक्ति का रास्ता बताती हैं; यह बात उनकी रचनाओं से पक्की है। फ़ातिमा शेख का नाम लें तो ध्यान रखें कि उनके बारे में दस्तावेज़ कम हैं और ब्योरे पर इतिहासकारों में बहस है।
भाषण की तैयारी कैसे करें
- भाषण दो बार ज़ोर से पढ़ें और समय देखें। 1 मिनट में लगभग 110 से 130 शब्द बोले जाते हैं।
- शुरुआत किसी दृश्य से करें, जैसे साड़ी बदलकर पढ़ाने वाली शिक्षिका। यह सुनने वालों को तुरंत बाँध लेता है।
- तारीख़ें (1831, 1848, 1897) साफ़ और धीरे बोलें।
- अंत में एक छोटा संकल्प दें जिसे सुनने वाले सच में कर सकें।
अभ्यास के लिए आप Yuga ऐप में सावित्रीबाई फुले से आवाज़ में बात करके उनसे उनके स्कूल के बारे में पूछ सकते हैं। यह उनकी रचनाओं और इतिहास पर आधारित एक AI पुनर्निर्माण है, असली सावित्रीबाई नहीं, और इससे गलती हो सकती है; भाषण के तथ्य ऊपर दिए स्रोतों से जाँच लें।
लोग क्या पूछते हैं
- सावित्रीबाई फुले जयंती कब मनाई जाती है?
- सावित्रीबाई फुले जयंती हर साल 3 जनवरी को मनाई जाती है, क्योंकि उनका जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा ज़िले के नायगाँव में हुआ था। स्कूलों में इस दिन लड़कियों की शिक्षा पर भाषण और कार्यक्रम होते हैं, और महाराष्ट्र में इसे बालिका दिन के रूप में भी मनाया जाता है।
- सावित्रीबाई फुले को किस नाम से जाना जाता है?
- उन्हें आम तौर पर भारत की पहली महिला शिक्षिका कहा जाता है, और महाराष्ट्र में 'क्रांतिज्योति' के नाम से भी याद किया जाता है। सटीक रूप से वे किसी भारतीय द्वारा चलाए गए लड़कियों के स्कूल की शुरुआती प्रशिक्षित भारतीय शिक्षिकाओं में थीं, जिन्होंने 1848 में पुणे में पढ़ाना शुरू किया।
- 1 मिनट के भाषण में क्या क्या बोलें?
- 1 मिनट के भाषण में चार बातें काफ़ी हैं: जन्म (3 जनवरी 1831, नायगाँव), 1848 में पुणे का कन्या विद्यालय और उसका विरोध, विधवाओं के लिए 1863 का आश्रय, और 1897 में प्लेग रोगियों की सेवा करते हुए निधन। अंत में एक छोटा संकल्प जोड़ें। इस पेज का 1 मिनट वाला भाषण इसी ढाँचे पर है।
- सावित्रीबाई फुले की कविताओं की किताब का नाम क्या है?
- उनका पहला कविता संग्रह 'काव्यफुले' 1854 में छपा। 1892 में 'बावनकशी सुबोध रत्नाकर' प्रकाशित हुई, जिसमें जोतीराव फुले के जीवन का वर्णन है। उनकी सारी रचनाएँ और पत्र एम. जी. माली द्वारा संपादित 'सावित्रीबाई फुले समग्र वाङ्मय' (1988) में मिलते हैं।
स्रोत
- Savitribai Phule Samagra Vangmay, ed. M. G. Mali (1988)
- Dhananjay Keer, जोतीराव फुले की अंग्रेज़ी जीवनी (Popular Prakashan, 1964)
- G. P. Deshpande (ed.), Selected Writings of Jotirao Phule (2002)