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रज़िया सुल्तान का जीवन परिचय

6 मिनट

रज़िया सुल्तान (जन्म लगभग 1205, मृत्यु अक्टूबर 1240) दिल्ली सल्तनत पर अपने नाम से राज करने वाली अकेली महिला थीं। वे सुल्तान इल्तुतमिश की बेटी थीं और 1236 से 1240 तक शासक रहीं। उन्होंने पर्दा छोड़ा, पुरुषों जैसा कोट और टोपी पहनकर दरबार लगाया, हाथी पर सेना का नेतृत्व किया और अपने नाम के सिक्के चलवाए। तुर्क अमीरों के विरोध के बाद 1240 में उन्हें गद्दी से हटाया गया और कैथल के पास उनकी हत्या हुई।

रज़िया सुल्तान कौन थीं

रज़िया दिल्ली सल्तनत के सुल्तान शम्सुद्दीन इल्तुतमिश (शासन 1211 से 1236) की बेटी थीं। उनके नाम को फ़ारसी स्रोत “रज़िया” लिखते हैं; हिंदी में रज़िया और रजिया दोनों रूप चलते हैं। उन्होंने अपने लिए “सुल्ताना” नहीं, बल्कि “सुल्तान” की उपाधि ली, यानी वे ख़ुद को रानी नहीं, पूरी शासक के रूप में पेश करती थीं।

उनके बारे में सबसे महत्वपूर्ण समकालीन स्रोत मिनहाज-उस-सिराज जुज़जानी की तबक़ात-ए-नासिरी (लगभग 1260) है। मिनहाज उसी दौर में दिल्ली में थे। बाद के स्रोत, जैसे इसामी की फ़ुतूह-उस-सलातीन (लगभग 1350) और इब्न बतूता का यात्रा वृत्तांत (लगभग 1355), कुछ और कहानियाँ जोड़ते हैं, पर वे सौ साल से अधिक बाद लिखे गए।

रज़िया सुल्तान के जीवन की मुख्य तिथियाँ

वर्षघटना
लगभग 1205जन्म (सही वर्ष अनिश्चित)
लगभग 1231 से 1232ग्वालियर अभियान के समय इल्तुतमिश ने दिल्ली का काम रज़िया को सौंपा और लौटकर उन्हें उत्तराधिकारी चुना (मिनहाज के अनुसार)
अप्रैल 1236इल्तुतमिश की मृत्यु; भाई रुकनुद्दीन फ़ीरोज़ गद्दी पर बैठा
नवंबर 1236रुकनुद्दीन को हटाकर रज़िया सुल्तान बनीं
1236 से 1240शासन; अपने नाम के सिक्के; याक़ूत को अमीर-ए-आख़ूर बनाया
अप्रैल 1240भटिंडा के इक़्तादार मलिक अल्तूनिया का विद्रोह; याक़ूत की हत्या, रज़िया बंदी
1240भाई मुइज़ुद्दीन बहराम शाह सुल्तान बना; रज़िया ने अल्तूनिया से विवाह किया
अक्टूबर 1240दिल्ली की ओर बढ़ते हुए हार; कैथल के पास हत्या

रज़िया गद्दी तक कैसे पहुँचीं

मिनहाज के अनुसार इल्तुतमिश ने अपने बेटों को योग्य न मानकर रज़िया को उत्तराधिकारी चुना। लेकिन उनकी मृत्यु के बाद अमीरों ने उनके बेटे रुकनुद्दीन फ़ीरोज़ को सुल्तान बना दिया। रुकनुद्दीन का शासन कुछ ही महीने चला; असली ताक़त उसकी माँ शाह तुर्कान के हाथ में थी और कई प्रांतों में विद्रोह हुए।

बाद के स्रोत, इसामी और इब्न बतूता, बताते हैं कि रज़िया ने जुमे की नमाज़ के समय दिल्ली के लोगों से सीधे न्याय की अपील की और जनता के समर्थन से गद्दी पाई। यह कहानी बाद के लेखकों की है, इसलिए इतिहासकार इसे सावधानी से लेते हैं। इतना पक्का है कि नवंबर 1236 में रुकनुद्दीन हटाया गया और रज़िया सुल्तान बनीं।

शासक के रूप में रज़िया ने क्या किया

मिनहाज लिखते हैं कि रज़िया ने पर्दा छोड़ दिया, क़बा (कोट) और कुलाह (टोपी) पहनकर लोगों के सामने आईं, दरबार में बैठीं और हाथी पर सवार होकर सेना के आगे चलीं। उनके चाँदी के टंके और ताँबे के सिक्के आज भी मिलते हैं, जिन पर उनका नाम सुल्तान की उपाधि के साथ है। ये सिक्के उनके शासन का सबसे सीधा प्रमाण हैं।

उन्होंने सत्ता को तुर्क ग़ुलाम अमीरों के छोटे घेरे से बाहर ले जाने की कोशिश की। अबीसीनियाई (अफ़्रीकी मूल के) जमालुद्दीन याक़ूत को अमीर-ए-आख़ूर, यानी शाही अस्तबल का प्रमुख, बनाना इसी का उदाहरण है। इससे तुर्क अमीर नाराज़ हुए। उन्होंने कुछ विद्रोहों को दबाया और शासन पर पकड़ बनाए रखने की कोशिश की।

मिनहाज ने उनकी प्रशंसा की कि वे समझदार, न्यायप्रिय, उदार और योग्य शासक थीं, और साथ ही लिखा कि वे स्त्री पैदा हुईं, इसलिए लोगों की नज़र में ये सब गुण बेकार रहे। यह वाक्य (यहाँ भाव के रूप में दिया गया) उस समय की सोच को बहुत साफ़ दिखाता है।

याक़ूत, अल्तूनिया और रज़िया का अंत

फ़िल्मों और धारावाहिकों में रज़िया और याक़ूत के प्रेम की कहानी बहुत दिखाई जाती है। समकालीन स्रोत केवल इतना बताते हैं कि याक़ूत रज़िया के करीबी थे और इससे अमीर नाराज़ थे। प्रेम संबंध की बात अनुमान है, प्रमाण नहीं। 1983 की फ़िल्म रज़िया सुल्तान भी इतिहास कम, कल्पना ज़्यादा है।

अप्रैल 1240 में भटिंडा (तबरहिंद) के इक़्तादार मलिक अल्तूनिया ने विद्रोह किया। रज़िया उसे दबाने गईं, पर उनके साथ के अमीरों ने उनका साथ छोड़ दिया, याक़ूत मारे गए और रज़िया बंदी बना ली गईं। दिल्ली में अमीरों ने उनके भाई मुइज़ुद्दीन बहराम शाह को सुल्तान बना दिया।

इसके बाद रज़िया ने अल्तूनिया से विवाह किया और दोनों सेना लेकर दिल्ली की ओर बढ़े। अक्टूबर 1240 में वे हार गए और भागते समय कैथल के पास दोनों की हत्या हुई। उनकी क़ब्र को लेकर दिल्ली (तुर्कमान गेट के पास) और कैथल, दोनों जगह दावे हैं; पक्का कहना मुश्किल है।

रज़िया सुल्तान के बारे में रोचक तथ्य

  • उनका शासन लगभग साढ़े तीन साल चला; मिनहाज इसे 3 साल 6 महीने और 6 दिन बताते हैं।
  • उनके बाद दिल्ली सल्तनत या मुग़ल साम्राज्य की गद्दी पर कोई महिला अपने नाम से शासक नहीं बनी।
  • रज़िया को हटाने वाले तुर्क अमीरों के समूह को बाद के इतिहासकार “चालीसा” या “चहलगानी” कहते हैं; यह नाम मुख्यतः बाद के लेखक बरनी से आता है।

पढ़ाई और प्रोजेक्ट के लिए सुझाव

प्रोजेक्ट में तीन तरह के प्रमाण अलग दिखाएँ: समकालीन लेखक (मिनहाज), सिक्के, और बाद के लेखक (इसामी, इब्न बतूता)। यह भी लिखें कि फ़िल्मों की कहानी किस हिस्से में अनुमान है। भारत की दूसरी शासक रानियों से तुलना के लिए भारत की महान रानियाँ पढ़ें।

आप Yuga ऐप में रज़िया सुल्तान से आवाज़ या टेक्स्ट में बात करके इंटरव्यू का अभ्यास कर सकते हैं। यह ऐतिहासिक स्रोतों से बना एक AI पुनर्निर्माण है, असली रज़िया नहीं; उनके अपने लिखे शब्द नहीं बचे हैं, इसलिए वह जो कहे वह व्याख्या है और ग़लत भी हो सकती है। प्रोजेक्ट में तबक़ात-ए-नासिरी और इतिहासकारों की किताबें उद्धृत करें।

लोग क्या पूछते हैं

रज़िया सुल्तान ने कितने साल राज किया?
रज़िया ने नवंबर 1236 से 1240 तक, लगभग साढ़े तीन साल राज किया। समकालीन इतिहासकार मिनहाज-उस-सिराज ने उनका शासन 3 साल 6 महीने और 6 दिन बताया है। अप्रैल 1240 में अल्तूनिया के विद्रोह के बाद वे बंदी बनीं और अक्टूबर 1240 में उनकी हत्या हुई।
रज़िया सुल्तान की मृत्यु कैसे हुई?
गद्दी से हटाए जाने के बाद रज़िया ने मलिक अल्तूनिया से विवाह किया और दोनों दिल्ली वापस लेने निकले। अक्टूबर 1240 में बहराम शाह की सेना से हारकर भागते समय कैथल (आज हरियाणा) के पास दोनों की हत्या कर दी गई। उनकी क़ब्र के बारे में दिल्ली और कैथल दोनों जगह दावे हैं।
क्या रज़िया और याक़ूत के बीच प्रेम था?
इसका प्रमाण नहीं है। समकालीन स्रोत बस यह कहते हैं कि रज़िया ने अफ़्रीकी मूल के याक़ूत को ऊँचा पद दिया और वे उनके करीबी थे, जिससे तुर्क अमीर नाराज़ हुए। प्रेम संबंध की बात बाद की कल्पना और फ़िल्मों से फैली; इतिहासकार इसे अनुमान मानते हैं।
रज़िया को सुल्तान क्यों कहा जाता है, सुल्ताना क्यों नहीं?
रज़िया ने ख़ुद “सुल्तान” की उपाधि अपनाई और उनके सिक्कों पर भी यही लिखा है। सुल्ताना का अर्थ सुल्तान की पत्नी हो सकता है, जबकि रज़िया अपने नाम से पूरी शासक थीं। इसलिए इतिहासकार उन्हें रज़िया सुल्तान कहना ज़्यादा सही मानते हैं।

स्रोत

  • तबक़ात-ए-नासिरी, मिनहाज-उस-सिराज जुज़जानी; अंग्रेज़ी अनुवाद H. G. Raverty, 1873 से 1881
  • फ़ुतूह-उस-सलातीन, इसामी, लगभग 1350
  • इब्न बतूता की रिहला; अंग्रेज़ी अनुवाद H. A. R. Gibb और C. F. Beckingham
  • The Delhi Sultanate: A Political and Military History, Peter Jackson, 1999
  • The Emergence of the Delhi Sultanate, 1192 to 1286, Sunil Kumar, 2007