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राष्ट्रीय गणित दिवस (22 दिसंबर) और रामानुजन

6 मिनट

राष्ट्रीय गणित दिवस हर साल 22 दिसंबर को श्रीनिवास रामानुजन (22 दिसंबर 1887 से 26 अप्रैल 1920) की जयंती पर मनाया जाता है। भारत सरकार ने दिसंबर 2011 में उनकी 125वीं जयंती के अवसर पर इसकी घोषणा की और 2012 को राष्ट्रीय गणित वर्ष घोषित किया। इस पेज पर दिवस का कारण, 1 मिनट का भाषण, 1729, विभाजन और जादुई वर्ग वाली कक्षा गतिविधियाँ और प्रश्नोत्तरी है।

राष्ट्रीय गणित दिवस 22 दिसंबर को ही क्यों

22 दिसंबर 1887 को तमिलनाडु के इरोड में श्रीनिवास रामानुजन का जन्म हुआ था। लगभग बिना औपचारिक प्रशिक्षण के उन्होंने संख्याओं, श्रेणियों और फ़ंक्शनों पर हज़ारों परिणाम खोजे। 26 दिसंबर 2011 को चेन्नई में उनकी 125वीं जयंती के समारोह में भारत सरकार ने घोषणा की कि 22 दिसंबर हर साल राष्ट्रीय गणित दिवस होगा और 2012 राष्ट्रीय गणित वर्ष।

इस दिन स्कूलों और कॉलेजों में गणित प्रश्नोत्तरी, पहेलियाँ, व्याख्यान और प्रदर्शनियाँ होती हैं। मक़सद यह है कि बच्चे गणित को रटने का विषय नहीं, खोज और खेल का विषय मानें, जैसा रामानुजन के लिए था।

रामानुजन का जीवन मुख्य तिथियों में

वर्षघटना
188722 दिसंबर को इरोड में जन्म; बचपन कुंभकोणम में
1903जी. एस. कार की 'Synopsis' से गणित में गहरी रुचि
1911पहला शोध पत्र, बर्नूली संख्याओं पर
191316 जनवरी को कैम्ब्रिज के जी. एच. हार्डी को पत्र
1914कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज पहुँचे
1918रॉयल सोसाइटी और ट्रिनिटी कॉलेज के फ़ेलो
192026 अप्रैल को कुंभकोणम में निधन, उम्र 32
1976ट्रिनिटी कॉलेज में उनकी 'खोई हुई नोटबुक' मिली
201122 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस घोषित

विस्तार से पढ़ें: श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी।

गणित दिवस पर 1 मिनट का भाषण

आदरणीय शिक्षकगण और मेरे साथियो, आज 22 दिसंबर है, राष्ट्रीय गणित दिवस। आज ही के दिन 1887 में श्रीनिवास रामानुजन का जन्म हुआ था। वे कॉलेज की परीक्षाओं में फ़ेल हो गए थे, क्योंकि गणित के अलावा किसी विषय में उनका मन नहीं लगता था। उन्होंने मद्रास में क्लर्क की नौकरी करते हुए अपने परिणाम कैम्ब्रिज के गणितज्ञ जी. एच. हार्डी को भेजे। हार्डी ने उन्हें इंग्लैंड बुलाया, और 1918 में वे रॉयल सोसाइटी के फ़ेलो बने। एक बार हार्डी ने टैक्सी नंबर 1729 को नीरस कहा, तो रामानुजन ने बताया कि यह दो घनों के योग के रूप में दो तरह से लिखी जाने वाली सबसे छोटी संख्या है। सिर्फ़ 32 साल की उम्र में उनका निधन हो गया, पर उनकी नोटबुकों पर गणितज्ञ आज भी काम कर रहे हैं। आइए, आज हम गणित से डरने के बजाय उसमें सवाल ढूँढना सीखें। धन्यवाद।

कक्षा गतिविधि 1: टैक्सी नंबर 1729

हार्डी ने अपनी किताब 'Ramanujan: Twelve Lectures' (1940) में लिखा है कि वे पटनी में बीमार रामानुजन से मिलने टैक्सी नंबर 1729 में गए थे। रामानुजन का जवाब था कि यह सबसे छोटी संख्या है जिसे दो घनों के योग के रूप में दो अलग तरीक़ों से लिखा जा सकता है।

  1. 1 से 12 तक के घन बोर्ड पर लिखवाएँ: 1, 8, 27, 64, 125, 216, 343, 512, 729, 1000, 1331, 1728।
  2. बच्चों से जोड़ियाँ ढूँढवाएँ जिनका योग 1729 हो। उत्तर: 1 + 1728 (यानी 1³ + 12³) और 729 + 1000 (यानी 9³ + 10³)।
  3. चर्चा करें कि 1729 से छोटी कोई संख्या ऐसी क्यों नहीं मिलती। बड़ी कक्षाएँ छोटी संख्याओं की जाँच ख़ुद करके देख सकती हैं।

कक्षा गतिविधि 2: संख्याओं का विभाजन

किसी संख्या का विभाजन (partition) उसे धनात्मक पूर्णांकों के योग के रूप में लिखने का तरीक़ा है, जिसमें क्रम नहीं गिना जाता। संख्या n के कुल विभाजनों को p(n) लिखते हैं। रामानुजन ने इस पर गहरा काम किया।

nविभाजनp(n)
111
22, 1+12
33, 2+1, 1+1+13
44, 3+1, 2+2, 2+1+1, 1+1+1+15
55, 4+1, 3+2, 3+1+1, 2+2+1, 2+1+1+1, 1+1+1+1+17

बच्चों से 6 के विभाजन गिनवाएँ (उत्तर 11)। फिर रामानुजन का एक खोजा हुआ नियम दिखाएँ: p(4) = 5, p(9) = 30, p(14) = 135, p(19) = 490। ये सब 5 से विभाज्य हैं। रामानुजन ने 1919 के शोध पत्र 'Some properties of p(n)' में बताया कि p(5n+4) हमेशा 5 से विभाज्य होता है। उन्होंने 7 और 11 के लिए भी ऐसे नियम दिए।

कक्षा गतिविधि 3: जन्मतिथि वाला जादुई वर्ग

नीचे का वर्ग अक्सर 'रामानुजन का जादुई वर्ग' कहकर साझा किया जाता है। इसकी पहली पंक्ति उनकी जन्मतिथि 22.12.1887 है, और हर पंक्ति, हर स्तंभ और दोनों विकर्णों का योग 139 है। सच यह है कि यह वर्ग आज के गणित प्रेमियों ने उनकी याद में बनाया है; रामानुजन ने ख़ुद अपनी पहली नोटबुक के शुरुआती अध्याय में जादुई वर्गों पर काम ज़रूर किया था, पर यह विशेष वर्ग उनका नहीं है। बच्चों को यह बताना भी अपने आप में एक सबक है।

22121887
8817925
10248916
19862311

गतिविधि: बच्चे सारे योग जाँचें, फिर अपनी जन्मतिथि से ऐसा ही वर्ग बनाने की कोशिश करें।

गणित दिवस प्रश्नोत्तरी (उत्तर सहित)

  1. रामानुजन का जन्म कहाँ हुआ? उत्तर: इरोड, तमिलनाडु।
  2. उन्होंने 1913 में किस गणितज्ञ को पत्र लिखा? उत्तर: जी. एच. हार्डी, कैम्ब्रिज।
  3. 1729 को दो घनों के योग के रूप में लिखिए। उत्तर: 1³ + 12³ और 9³ + 10³।
  4. 4 के कितने विभाजन होते हैं? उत्तर: 5।
  5. रामानुजन रॉयल सोसाइटी के फ़ेलो कब बने? उत्तर: 1918।
  6. राष्ट्रीय गणित वर्ष कौन सा था? उत्तर: 2012।
  7. भारत के किस प्राचीन गणितज्ञ ने π का मान लगभग 3.1416 बताया? उत्तर: आर्यभट, 'आर्यभटीय' (499 ईस्वी) में।

आख़िरी सवाल के बारे में और जानने के लिए पढ़ें आर्यभट का योगदान।

अगर कक्षा रामानुजन से ख़ुद सवाल पूछना चाहे, तो Yuga ऐप में रामानुजन से आवाज़ में बात की जा सकती है। यह उनके पत्रों और जीवनियों पर बना AI पुनर्निर्माण है, असली रामानुजन नहीं, और यह गणित में भी गलती कर सकता है; कक्षा में किसी सूत्र को सही मानने से पहले किताब में जाँचें।

लोग क्या पूछते हैं

राष्ट्रीय गणित दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय गणित दिवस हर साल 22 दिसंबर को मनाया जाता है, जो श्रीनिवास रामानुजन का जन्मदिन है। भारत सरकार ने दिसंबर 2011 में उनकी 125वीं जयंती के समारोह में इसकी घोषणा की और 2012 को राष्ट्रीय गणित वर्ष घोषित किया। इसका मक़सद गणित में रुचि बढ़ाना और रामानुजन के काम को याद करना है।
राष्ट्रीय गणित दिवस की शुरुआत कब हुई?
घोषणा 26 दिसंबर 2011 को चेन्नई में हुई, और पहला राष्ट्रीय गणित दिवस 22 दिसंबर 2012 को मनाया गया, जो राष्ट्रीय गणित वर्ष भी था। तब से हर साल 22 दिसंबर को स्कूलों, कॉलेजों और संस्थानों में कार्यक्रम होते हैं।
गणित दिवस पर स्कूल में कौन सी गतिविधियाँ करें?
तीन आसान गतिविधियाँ हैं: 1729 को दो घनों के योग के रूप में ढूँढना, छोटी संख्याओं के विभाजन गिनना और p(5n+4) का 5 से विभाज्य होना देखना, और जन्मतिथि वाला जादुई वर्ग जाँचना। इसके साथ एक छोटी प्रश्नोत्तरी और रामानुजन पर 1 मिनट का भाषण रखा जा सकता है। ये सब इस पेज पर दिए हैं।
क्या जन्मतिथि वाला जादुई वर्ग रामानुजन ने बनाया था?
नहीं। 22, 12, 18, 87 से शुरू होने वाला वर्ग उनकी याद में आज के गणित प्रेमियों ने बनाया है, हालाँकि इसे अक्सर उनका बताया जाता है। रामानुजन ने अपनी पहली नोटबुक में जादुई वर्गों पर ज़रूर काम किया था। कक्षा में यह फ़र्क़ बताना अच्छी आदत है।

स्रोत

  • G. H. Hardy, Ramanujan: Twelve Lectures on Subjects Suggested by His Life and Work (1940)
  • S. Ramanujan, Some properties of p(n), the number of partitions of n, Proceedings of the Cambridge Philosophical Society (1919)
  • Bruce C. Berndt, Ramanujan's Notebooks, Part I (1985)
  • Robert Kanigel, The Man Who Knew Infinity (1991)