प्राचीन भारत के महान विद्वान और उनके ग्रंथ
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प्राचीन भारत के सबसे प्रसिद्ध विद्वानों में गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट (आर्यभटीय, 499 ईसवी), राजनीति के आचार्य चाणक्य या कौटिल्य (अर्थशास्त्र, जिसकी तिथि पर बहस है), शल्य चिकित्सक सुश्रुत (सुश्रुत संहिता) और कवि कालिदास (अभिज्ञानशाकुन्तलम्, मेघदूत) हैं। व्याकरणाचार्य पाणिनि का अष्टाध्यायी भी इसी परंपरा का बड़ा ग्रंथ है। इनमें से अधिकतर के जीवन के बारे में कम पता है; हम उन्हें मुख्य रूप से उनके ग्रंथों से जानते हैं।
यह सूची कैसे चुनी गई
प्राचीन भारत में सैकड़ों विद्वान हुए। यहाँ उन चार को विस्तार से रखा गया है जिनके ग्रंथ आज भी पढ़े जाते हैं और जिनके बारे में छात्र सबसे ज़्यादा खोजते हैं: गणित और खगोल, राजनीति और अर्थशास्त्र, चिकित्सा, और साहित्य से एक-एक नाम। हर नाम के साथ तिथि, मुख्य ग्रंथ, एक मूल पंक्ति या ठोस तथ्य, और एक आम ग़लतफ़हमी दी गई है।
एक बात पहले समझ लें: प्राचीन भारत के ज़्यादातर विद्वानों ने अपने बारे में बहुत कम लिखा। आर्यभट अपवाद हैं, जिन्होंने अपनी उम्र बताई। बाक़ी के बारे में बहुत सी कहानियाँ बाद की परंपरा से आती हैं। इसलिए हर दावे के साथ यह पूछें: यह बात किस ग्रंथ में लिखी है?
चारों विद्वान एक नज़र में
| विद्वान | समय | मुख्य ग्रंथ | विषय |
|---|---|---|---|
| आर्यभट | जन्म 476 ईसवी; आर्यभटीय 499 ईसवी | आर्यभटीय (121 श्लोक) | गणित, खगोल |
| चाणक्य (कौटिल्य) | परंपरा से चौथी सदी ईसा पूर्व; ग्रंथ का मुख्य संपादन बाद का माना जाता है | अर्थशास्त्र (परंपरा से उनका) | शासन, अर्थ, क़ानून, कूटनीति |
| सुश्रुत | अनिश्चित; ग्रंथ का मूल पहली सहस्राब्दी ईसा पूर्व तक जा सकता है | सुश्रुत संहिता | आयुर्वेद, शल्य चिकित्सा |
| कालिदास | अनिश्चित; अधिकतर विद्वान चौथी से पाँचवीं सदी ईसवी मानते हैं | अभिज्ञानशाकुन्तलम्, मेघदूत, रघुवंश | काव्य, नाटक |
आर्यभट: पृथ्वी का घूमना और पाई का मान
आर्यभट ने आर्यभटीय 499 ईसवी में कुसुमपुर (जिसे आम तौर पर पाटलिपुत्र, आज का पटना, माना जाता है) में लिखा। ग्रंथ के कालक्रियापाद में वे ख़ुद बताते हैं कि कलियुग के 3600 वर्ष बीतने पर वे 23 साल के थे, जिससे उनका जन्म 476 ईसवी निकलता है। आर्यभटीय में चार भाग और कुल 121 श्लोक हैं।
उन्होंने पाई का मान बहुत सटीक दिया और ख़ुद उसे “आसन्न”, यानी लगभग, कहा:
“चतुरधिकं शतमष्टगुणं द्वाषष्टिस्तथा सहस्राणाम्। अयुतद्वयविष्कम्भस्यासन्नो वृत्तपरिणाहः॥”
उन्होंने लिखा कि जैसे चलती नाव में बैठे आदमी को किनारे की चीज़ें उलटी दिशा में चलती दिखती हैं, वैसे ही पृथ्वी के घूमने से स्थिर तारे पश्चिम की ओर चलते दिखते हैं (गोलपाद, श्लोक 9)। ग्रहण को उन्होंने राहु से नहीं, चंद्रमा और पृथ्वी की छाया से समझाया।
आम ग़लतफ़हमी: “आर्यभट ने शून्य का आविष्कार किया।” उनका काम दशमलव स्थानमान पद्धति को मानकर चलता है, पर शून्य को अलग संख्या के रूप में नियमों के साथ बाद में ब्रह्मगुप्त (628 ईसवी) ने लिखा। आर्यभट ने यह दावा कहीं नहीं किया। ब्रह्मगुप्त ने आर्यभट के कई विचारों की आलोचना भी की। भारत का पहला उपग्रह, जो 19 अप्रैल 1975 को छोड़ा गया, उन्हीं के नाम पर आर्यभट कहलाया। विस्तार से: आर्यभट का योगदान।
चाणक्य (कौटिल्य): अर्थशास्त्र और शासन
परंपरा के अनुसार चाणक्य, जिन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त भी कहा जाता है, ने चंद्रगुप्त मौर्य को नंद वंश हटाने में मदद की। यह कहानी विशाखदत्त के नाटक मुद्राराक्षस और जैन व बौद्ध ग्रंथों से आती है, जो सदियों बाद लिखे गए। अर्थशास्त्र परंपरा से उनका माना जाता है, पर थॉमस ट्राउटमैन और पैट्रिक ओलिवेल जैसे विद्वान मानते हैं कि ग्रंथ कई चरणों में बना; ओलिवेल इसके मुख्य संपादन को लगभग 50 ईसा पूर्व से 300 ईसवी के बीच रखते हैं।
अर्थशास्त्र की पांडुलिपि सदियों तक लगभग भुला दी गई थी; बीसवीं सदी की शुरुआत में मैसूर में आर. शामशास्त्री ने उसे पहचाना, संस्कृत पाठ छापा और 1915 में अंग्रेज़ी अनुवाद प्रकाशित किया। इसमें कर, खान, व्यापार, क़ानून, जासूसी, युद्ध और विदेश नीति (मंडल सिद्धांत) पर विस्तृत नियम हैं। इसका सबसे प्रसिद्ध विचार राजा के कर्तव्य पर है:
“प्रजासुखे सुखं राज्ञः प्रजानां च हिते हितम्। नात्मप्रियं हितं राज्ञः प्रजानां तु प्रियं हितम्॥”
आम ग़लतफ़हमी: इंटरनेट पर घूमने वाले “चाणक्य नीति” के ज़्यादातर उद्धरण अर्थशास्त्र से नहीं हैं। चाणक्य नीति एक अलग, बाद का सूक्ति-संग्रह है जिसके लेखक का पता नहीं। विस्तार से: चाणक्य के विचार।
सुश्रुत: सुश्रुत संहिता और शल्य चिकित्सा
सुश्रुत संहिता आयुर्वेद का वह ग्रंथ है जो शल्य चिकित्सा (सर्जरी) पर सबसे ज़्यादा ध्यान देता है। ग्रंथ में सुश्रुत काशी के राजा दिवोदास धन्वंतरि के शिष्य हैं। इसमें गाल की त्वचा से नाक बनाने की विधि (सूत्रस्थान 16), मोतियाबिंद हटाने की विधि, लगभग 101 कुंद और 20 धारदार औज़ार, और छात्रों के लिए लौकी, खीरे और चमड़े पर अभ्यास करने की सलाह (सूत्रस्थान 9) है।
आम ग़लतफ़हमी: “सुश्रुत 600 ईसा पूर्व में हुए।” यह तिथि अक्सर पक्की बताई जाती है, पर विद्वान मानते हैं कि ग्रंथ परतों में बना और उसका अंतिम भाग उत्तरतंत्र बाद में जुड़ा। सबसे पुरानी तिथि वाली पांडुलिपि नेपाल की है, 878 ईसवी की। विस्तार से: सुश्रुत और शल्य चिकित्सा।
कालिदास: संस्कृत के सबसे प्रसिद्ध कवि
कालिदास के सात ग्रंथ आम तौर पर उनके माने जाते हैं: तीन नाटक (अभिज्ञानशाकुन्तलम्, विक्रमोर्वशीय, मालविकाग्निमित्र), दो महाकाव्य (रघुवंश, कुमारसंभव), मेघदूत, और विवादित ऋतुसंहार। उनका सबसे पुराना पक्का उल्लेख 634 ईसवी के ऐहोल शिलालेख में है। रघुवंश के पहले सर्ग में वे कहते हैं कि अच्छे राजा प्रजा से कर उसी तरह लेते हैं जैसे सूर्य धरती से जल खींचकर हज़ार गुना बरसाकर लौटाता है; यह विचार ऊपर दिए अर्थशास्त्र के श्लोक से मेल खाता है।
आम ग़लतफ़हमी: “कालिदास पहले मूर्ख थे और काली की कृपा से विद्वान बने।” यह किंवदंती है, इसका कोई समकालीन प्रमाण नहीं। विस्तार से: कालिदास की जीवनी।
और भी विद्वान जिनके बारे में पढ़ना चाहिए
- पाणिनि: संस्कृत व्याकरण का ग्रंथ अष्टाध्यायी, लगभग 4000 सूत्रों में; उनका समय आम तौर पर पाँचवीं से चौथी सदी ईसा पूर्व के आसपास माना जाता है। आधुनिक भाषाविज्ञान में भी इस ग्रंथ की संरचना का अध्ययन होता है।
- चरक: चरक संहिता, आयुर्वेद का काय चिकित्सा पर मुख्य ग्रंथ; सुश्रुत संहिता के साथ पढ़ा जाता है।
- वराहमिहिर: छठी सदी के खगोलशास्त्री; पंचसिद्धांतिका में उस समय के पाँच खगोल सिद्धांतों का सार दिया।
- ब्रह्मगुप्त: ब्रह्मस्फुटसिद्धांत (628 ईसवी) में शून्य और ऋण संख्याओं के साथ गणना के नियम लिखे।
- पतंजलि: पाणिनि के व्याकरण पर महाभाष्य के लेखक; योगसूत्र के लेखक भी इसी नाम से जाने जाते हैं, पर दोनों एक ही व्यक्ति थे या नहीं, इस पर विद्वानों में मतभेद है।
पढ़ाई और प्रोजेक्ट के लिए सुझाव
एक अच्छा प्रोजेक्ट है: हर विद्वान के लिए एक “दावा और प्रमाण” कार्ड। एक तरफ़ लोकप्रिय दावा लिखें, दूसरी तरफ़ ग्रंथ में वास्तव में क्या लिखा है और विद्वान क्या कहते हैं। वैज्ञानिकों की आगे की कहानी के लिए भारत के महान वैज्ञानिक पढ़ें।
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लोग क्या पूछते हैं
- क्या आर्यभट ने शून्य का आविष्कार किया था?
- नहीं, यह आम ग़लतफ़हमी है। आर्यभटीय (499 ईसवी) दशमलव स्थानमान पद्धति को मानकर चलता है, पर शून्य को एक संख्या मानकर उसके साथ गणना के नियम ब्रह्मगुप्त ने 628 ईसवी में ब्रह्मस्फुटसिद्धांत में लिखे। आर्यभट की असली उपलब्धियों में पाई का सटीक मान, पृथ्वी के घूमने का विचार और ग्रहण की सही व्याख्या शामिल हैं।
- क्या अर्थशास्त्र सच में चाणक्य ने लिखा?
- परंपरा इसे कौटिल्य (चाणक्य) का मानती है, और ग्रंथ में भी उनका नाम आता है। पर कई आधुनिक विद्वान, जैसे थॉमस ट्राउटमैन और पैट्रिक ओलिवेल, मानते हैं कि ग्रंथ कई चरणों में बना और इसका मुख्य संपादन लगभग 50 ईसा पूर्व से 300 ईसवी के बीच हुआ। इसलिए इसे “परंपरा से कौटिल्य का” कहना सबसे सही है।
- प्राचीन भारत के सबसे बड़े विद्वान कौन थे?
- कोई एक नाम नहीं है, क्योंकि अलग-अलग विषयों में अलग विद्वान अग्रणी थे। गणित और खगोल में आर्यभट और ब्रह्मगुप्त, व्याकरण में पाणिनि, चिकित्सा में सुश्रुत और चरक, राजनीति में कौटिल्य, और साहित्य में कालिदास सबसे प्रसिद्ध हैं।
- पाणिनि ने क्या लिखा?
- पाणिनि ने अष्टाध्यायी लिखी, संस्कृत व्याकरण का ग्रंथ जिसमें लगभग 4000 छोटे सूत्र हैं। यह भाषा के नियमों को बहुत संक्षिप्त और व्यवस्थित रूप में रखता है। उनका समय आम तौर पर पाँचवीं से चौथी सदी ईसा पूर्व के आसपास माना जाता है, पर सटीक तिथि पर मतभेद है।
स्रोत
- आर्यभटीय; अंग्रेज़ी अनुवाद Walter Eugene Clark, 1930; समीक्षात्मक संस्करण K. S. Shukla और K. V. Sarma, 1976
- कौटिलीय अर्थशास्त्र; अंग्रेज़ी अनुवाद R. Shamasastry; समीक्षात्मक संस्करण R. P. Kangle
- King, Governance, and Law in Ancient India: Kautilya's Arthasastra, Patrick Olivelle, 2013
- An English Translation of the Sushruta Samhita, Kaviraj Kunja Lal Bhishagratna
- Mathematics in India, Kim Plofker, 2009
- A History of Ancient and Early Medieval India, Upinder Singh, 2008