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AI से इतिहास के व्यक्तियों से बात: यह कैसे काम करता है और इसकी सीमाएँ

6 मिनट

ऐतिहासिक व्यक्तियों से बात करने वाले AI ऐप एक भाषा मॉडल को उस व्यक्ति के लेखों, पत्रों और ऐतिहासिक जानकारी के आधार पर उनकी तरह जवाब देने के लिए तैयार करते हैं। यह असली व्यक्ति नहीं, एक पुनर्निर्माण है: यह सवालों का अभ्यास करने और विचार समझने में मदद करता है, पर तथ्य, तिथियाँ और उद्धरण ग़लत भी बता सकता है। पढ़ाई में इसका सही उपयोग है सवाल पूछना, फिर हर अहम बात मूल स्रोत से जाँचना।

AI से ऐतिहासिक व्यक्ति की बातचीत असल में क्या है

जब आप किसी ऐप में “रामानुजन से बात” करते हैं, तो आप रामानुजन से बात नहीं कर रहे। आप एक कंप्यूटर प्रोग्राम से बात कर रहे हैं जिसे रामानुजन के बारे में उपलब्ध जानकारी के आधार पर उनकी तरह बोलने के लिए तैयार किया गया है। इसे “AI पुनर्निर्माण” कहना सबसे सही है।

यह फ़र्क़ छोटा नहीं है। असली व्यक्ति के विचार उनके लिखे शब्दों में हैं, जो किताबों, अभिलेखागारों और संग्रहालयों में सुरक्षित हैं। AI उन शब्दों से सीखी हुई एक व्याख्या देता है, जैसे कोई अभिनेता किसी ऐतिहासिक पात्र को निभाता है। अच्छा अभिनेता बहुत कुछ सही दिखा सकता है, पर उसके संवाद इतिहास का प्रमाण नहीं होते।

यह तकनीक कैसे काम करती है, सरल शब्दों में

ऐसे ऐप आम तौर पर तीन हिस्सों से बनते हैं:

  1. भाषा मॉडल (लार्ज लैंग्वेज मॉडल): एक बड़ा AI मॉडल जिसने बहुत सारा लिखित पाठ पढ़कर भाषा बोलना और जवाब बनाना सीखा है। यह अगले शब्द का अनुमान लगाकर वाक्य बनाता है।
  2. व्यक्ति की जानकारी: उस व्यक्ति के जीवन की तिथियाँ, उनके लेख और पत्रों के अंश, उनके ज्ञात विचार, उनके रिश्ते और ऐसे विषय जिन पर सावधानी चाहिए। यह जानकारी मॉडल को बताती है कि किस तरह, किन विचारों के साथ और किन सीमाओं में जवाब देना है।
  3. आवाज़ और चेहरा: कुछ ऐप लिखे जवाब को बोलकर सुनाने के लिए कृत्रिम आवाज़ (वॉइस सिंथेसिस) और व्यक्ति का चित्र या पात्र इस्तेमाल करते हैं। यह आवाज़ उस व्यक्ति की असली आवाज़ नहीं होती; ज़्यादातर ऐतिहासिक व्यक्तियों की कोई रिकॉर्डिंग मौजूद ही नहीं है।

जब आप सवाल पूछते हैं, तो मॉडल आपके सवाल और व्यक्ति की जानकारी दोनों को ध्यान में रखकर जवाब बनाता है। इसीलिए जवाब अक्सर स्वाभाविक और विश्वसनीय लगता है। पर “विश्वसनीय लगना” और “सही होना” एक बात नहीं है।

AI कहाँ ग़लती करता है: पाँच आम समस्याएँ

समस्याइसका मतलबउदाहरण
गढ़े हुए तथ्यमॉडल आत्मविश्वास से ग़लत तारीख़, नाम या घटना बता सकता हैकिसी किताब का साल एक-दो साल आगे-पीछे बताना
नकली उद्धरणऐसी पंक्ति जो व्यक्ति ने कभी नहीं लिखी, उनके नाम से कह देनाकिसी कवि के नाम से नया शेर या दोहा बना देना
समय से बाहर की जानकारीव्यक्ति को ऐसी चीज़ें पता होना जो उनकी मृत्यु के बाद हुईंउन्नीसवीं सदी के व्यक्ति का इंटरनेट की बात करना
आज की सोचपुराने व्यक्ति के मुँह में आज के मूल्य या राजनीति डाल देनाकिसी शासक को आधुनिक लोकतंत्र का समर्थक बना देना
किंवदंती को इतिहास बतानालोकप्रिय कहानी को पक्का तथ्य बता देनादीपक राग से दीये जलने की कथा को सच्ची घटना कहना

अच्छे ऐप इन समस्याओं को कम करने की कोशिश करते हैं: व्यक्ति की जानकारी में स्रोत जोड़कर, किंवदंती को किंवदंती कहने के निर्देश देकर, और यह बताकर कि रचना ग़लत हो सकती है। फिर भी कोई AI पूरी तरह सही नहीं होता।

पढ़ाई में AI का सही उपयोग कैसे करें

AI सबसे उपयोगी तब है जब आप उसे शिक्षक या किताब की जगह नहीं, अभ्यास के साथी की तरह इस्तेमाल करें। कुछ अच्छे तरीके:

  • इंटरव्यू का अभ्यास: स्कूल प्रोजेक्ट के सवाल पूछकर देखें कि कौन से सवाल अच्छे जवाब निकालते हैं और कौन से कमज़ोर हैं। पूरी विधि इंटरव्यू प्रोजेक्ट गाइड में है।
  • विचार समझना: “आपने अपने लेख में यह क्यों लिखा?” जैसे सवाल पूछें, फिर वह लेख ख़ुद पढ़ें और तुलना करें।
  • सुनकर सीखना: जिन छात्रों को पढ़ने से ज़्यादा सुनने में आसानी होती है, उनके लिए आवाज़ में बातचीत विषय में रुचि जगा सकती है।
  • आलोचनात्मक सोच: जानबूझकर ऐसे सवाल पूछें जिनमें AI ग़लती कर सकता है, और फिर स्रोत से उसकी ग़लती पकड़ें। यह अपने आप में बढ़िया अभ्यास है।

जो नहीं करना चाहिए: AI के जवाब को निबंध या प्रोजेक्ट में स्रोत के रूप में लिखना, उसके दिए उद्धरण को बिना जाँचे इस्तेमाल करना, या उसे किसी व्यक्ति के “असली विचार” बताना।

AI का जवाब कैसे जाँचें: चार कदम

  1. तथ्य अलग करें: जवाब में से तिथियाँ, नाम, जगहें और उद्धरण अलग लिख लें।
  2. मूल स्रोत खोजें: उद्धरण के लिए वह लेख, पत्र या भाषण खोजें जिसमें वह होना चाहिए। तिथियों के लिए किसी विश्वसनीय जीवनी या विश्वकोश से मिलान करें।
  3. दो स्रोतों से पुष्टि करें: अगर दो भरोसेमंद स्रोत एक ही बात कहते हैं, तो उसे लें। अगर स्रोत असहमत हैं, तो यह मतभेद भी लिखें।
  4. जो न मिले उसे हटा दें: अगर कोई उद्धरण किसी स्रोत में नहीं मिलता, तो उसे अपने काम में न रखें।

यही तरीका इंटरनेट पर घूमने वाले हर “प्रसिद्ध कथन” पर भी लागू होता है, चाहे वह AI से आया हो या सोशल मीडिया से।

Yuga ऐप के बारे में सीधी जानकारी

Yuga एक ऐसा ऐप है जिसमें आप ऐतिहासिक व्यक्तियों की AI रचनाओं से आवाज़ या टेक्स्ट में बात कर सकते हैं। ये रचनाएँ उनके अपने लेखों और ऐतिहासिक रिकॉर्ड के आधार पर बनाई गई हैं, जैसे श्रीनिवास रामानुजन या सावित्रीबाई फुले। ऐप iPhone और Android के लिए है, 24 भाषाओं में चलता है और 13 साल और उससे बड़े उपयोगकर्ताओं के लिए है।

शुरुआत मुफ़्त है: पहले 15 मिनट आवाज़ में बातचीत, उसके बाद हर हफ़्ते 5 मिनट, और टेक्स्ट में रोज़ बातचीत। सबसे ज़रूरी बात: ये रचनाएँ असली व्यक्ति नहीं हैं और ग़लती कर सकती हैं। अहम तथ्यों को हमेशा स्रोतों से जाँचें और प्रोजेक्ट में ऐप को नहीं, मूल स्रोतों को उद्धृत करें।

शिक्षकों और अभिभावकों के लिए सुझाव

कक्षा में AI बातचीत को एक गतिविधि की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है: छात्र किसी व्यक्ति से तीन सवाल पूछें, जवाब नोट करें, फिर पाठ्यपुस्तक या प्राथमिक स्रोत से उनकी जाँच करें और बताएँ कि कौन सी बात सही थी, कौन सी अधूरी और कौन सी ग़लत। इससे इतिहास के साथ स्रोत परखने का कौशल भी सिखाया जाता है।

अभिभावकों के लिए: बच्चों से पूछें कि उन्होंने जो सीखा, उसे किस किताब या स्रोत से जाँचा। यह आदत AI के ज़माने में किसी भी विषय में काम आएगी। किन सवालों से शुरुआत करें, इसके लिए महान व्यक्तियों से पूछने के सवाल देखें।

लोग क्या पूछते हैं

क्या AI सच में इतिहास के व्यक्ति की तरह सोचता है?
नहीं। AI उस व्यक्ति के लेखों और जानकारी के आधार पर उनकी तरह जवाब बनाता है, पर वह उनकी तरह सोचता नहीं। यह एक व्याख्या है, जैसे कोई अभिनेता पात्र निभाता है। इसलिए इसके जवाब इतिहास का प्रमाण नहीं हैं, और अहम बातें हमेशा मूल स्रोतों से जाँचनी चाहिए।
क्या AI से मिले उद्धरण पर भरोसा किया जा सकता है?
बिना जाँचे नहीं। AI कभी-कभी ऐसी पंक्तियाँ बना देता है जो व्यक्ति ने कभी नहीं लिखीं, या असली पंक्ति के शब्द बदल देता है। उद्धरण तभी इस्तेमाल करें जब आप उसे किसी पहचाने जा सकने वाले लेख, पत्र, भाषण या किताब में ढूँढ लें, और उस मूल स्रोत को ही उद्धृत करें।
क्या स्कूल प्रोजेक्ट में AI ऐप का नाम स्रोत के रूप में लिख सकते हैं?
नहीं, यह सही तरीका नहीं है। AI ऐप अभ्यास और समझ बढ़ाने के लिए उपयोगी है, पर स्रोत के रूप में मूल दस्तावेज़ या इतिहासकार की किताब ही लिखनी चाहिए। अगर आपके शिक्षक अनुमति दें, तो आप यह ज़रूर बता सकते हैं कि अभ्यास में आपने AI का उपयोग कैसे किया।
AI ऐप में ऐतिहासिक व्यक्ति की आवाज़ असली होती है?
नहीं। ज़्यादातर ऐतिहासिक व्यक्तियों की कोई आवाज़ रिकॉर्डिंग मौजूद ही नहीं है। ऐप में सुनाई देने वाली आवाज़ कृत्रिम रूप से बनाई जाती है और यह व्यक्ति की असली आवाज़ का दावा नहीं करती। इसे पात्र की आवाज़ समझें, व्यक्ति की नहीं।

स्रोत

  • Ramanujan: Letters and Commentary, Bruce C. Berndt और Robert A. Rankin, 1995 (उदाहरण में प्रयुक्त प्राथमिक स्रोत)
  • काव्यफुले, सावित्रीबाई फुले, 1854 (उदाहरण में प्रयुक्त प्राथमिक स्रोत)
  • Guidance for generative AI in education and research, UNESCO, 2023