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चंद्रगुप्त मौर्य का जीवन परिचय

6 मिनट

चंद्रगुप्त मौर्य (लगभग 350 से 295 ईसा पूर्व) ने लगभग 321 ईसा पूर्व मगध के नंद वंश को हटाकर मौर्य साम्राज्य की स्थापना की और पाटलिपुत्र से लगभग 297 ईसा पूर्व तक राज किया। यूनानी लेखक उन्हें सैंड्रोकोटस कहते थे। लगभग 303 ईसा पूर्व उन्होंने सेल्यूकस प्रथम से संधि करके 500 हाथियों के बदले उत्तर-पश्चिम के इलाक़े पाए, और सेल्यूकस का दूत मेगस्थनीज़ उनके दरबार में रहा। जैन परंपरा कहती है कि अंत में वे मुनि बने और श्रवणबेलगोला में देह त्यागी।

चंद्रगुप्त मौर्य के बारे में हम कैसे जानते हैं

चंद्रगुप्त का अपना कोई शिलालेख नहीं मिला है। उनके बारे में जानकारी तीन तरह के स्रोतों से आती है, और इन्हें अलग रखना ज़रूरी है:

  • यूनानी और रोमन लेखक: मेगस्थनीज़ की खोई हुई किताब इंडिका के अंश, जो स्ट्रैबो, एरियन और डियोडोरस ने उद्धृत किए; और जस्टिन, प्लूटार्क व एप्पियन जैसे बाद के लेखक।
  • बाद के भारतीय शिलालेख: लगभग 150 ईसवी का रुद्रदामन का जूनागढ़ शिलालेख, जो बताता है कि चंद्रगुप्त के प्रांतपाल पुष्यगुप्त ने गिरनार के पास सुदर्शन झील बनवाई।
  • बाद की साहित्यिक और धार्मिक परंपराएँ: विशाखदत्त का नाटक मुद्राराक्षस, हेमचंद्र का जैन ग्रंथ परिशिष्टपर्वन (बारहवीं सदी), और बौद्ध ग्रंथ।

चाणक्य को उनका गुरु और मार्गदर्शक बताने वाली प्रसिद्ध कहानियाँ इन्हीं बाद की परंपराओं से आती हैं, समकालीन स्रोतों से नहीं। इन्हें परंपरा के रूप में पढ़ें।

चंद्रगुप्त मौर्य के जीवन की मुख्य तिथियाँ

समय (ईसा पूर्व)घटनास्रोत
लगभग 350जन्मअनुमान
326 से 325सिकंदर का पंजाब अभियान; प्लूटार्क के अनुसार युवा चंद्रगुप्त ने सिकंदर को देखाप्लूटार्क, सिकंदर की जीवनी 62
लगभग 321नंद वंश को हटाकर मगध पर अधिकार; पाटलिपुत्र राजधानीयूनानी और भारतीय स्रोत, तिथि अनुमानित
लगभग 305 से 303सेल्यूकस प्रथम से युद्ध और संधि; 500 हाथियों के बदले उत्तर-पश्चिम के इलाक़ेस्ट्रैबो 15.2.9; एप्पियन
लगभग 300मेगस्थनीज़ पाटलिपुत्र में सेल्यूकस के दूतइंडिका के अंश
लगभग 297शासन का अंत; पुत्र बिंदुसार राजा बनेअनुमान
लगभग 295जैन परंपरा के अनुसार श्रवणबेलगोला में सल्लेखना से देह त्यागजैन परंपरा, बाद के स्रोत

नंदों से मगध तक: मौर्य साम्राज्य की स्थापना

चौथी सदी ईसा पूर्व में मगध पर नंद वंश का राज था, जिसके पास बड़ी सेना और ख़ज़ाना था पर जो जनता में अलोकप्रिय बताया जाता है। सिकंदर के लौटने (325 ईसा पूर्व) और उसकी मृत्यु (323 ईसा पूर्व) के बाद पंजाब में यूनानी प्रशासन कमज़ोर हुआ। रोमन लेखक जस्टिन लिखता है कि सैंड्रोकोटस ने भारतीयों को यूनानी प्रांतपालों से मुक्त कराने का नेतृत्व किया और फिर ख़ुद शासक बन गया।

लगभग 321 ईसा पूर्व चंद्रगुप्त ने नंद राजा को हराकर पाटलिपुत्र पर अधिकार किया। लड़ाइयों का सही क्रम और विवरण स्रोतों से साफ़ नहीं होता। उनके मूल को लेकर भी स्रोत अलग-अलग बातें कहते हैं: बौद्ध ग्रंथ उन्हें मोरिय नाम के क्षत्रिय कुल से बताते हैं, बाद की कुछ परंपराएँ उनकी माँ का नाम मुरा बताती हैं, और जस्टिन उन्हें साधारण परिवार का कहता है। आज कई समुदाय उन्हें अपना बताते हैं; इतिहासकार इस प्रश्न को खुला मानते हैं।

सेल्यूकस से युद्ध और संधि

सिकंदर के सेनापति सेल्यूकस प्रथम ने उसके पूर्वी साम्राज्य पर अधिकार किया और लगभग 305 ईसा पूर्व सिंधु की ओर बढ़ा। युद्ध का विवरण नहीं बचा, पर नतीजा दर्ज है। यूनानी भूगोलवेत्ता स्ट्रैबो (भूगोल 15.2.9) के अनुसार सेल्यूकस ने सिंधु के पश्चिम के कुछ इलाक़े चंद्रगुप्त को दिए और बदले में 500 हाथी लिए, साथ में विवाह संबंध या आपस में विवाह के अधिकार का समझौता हुआ।

ये इलाक़े आज के अफ़ग़ानिस्तान और बलूचिस्तान के हिस्से थे। यही हाथी बाद में 301 ईसा पूर्व की इप्सस की लड़ाई में सेल्यूकस के काम आए। विवाह संबंध का अर्थ क्या था, किसकी शादी किससे हुई, यह स्रोतों से साफ़ नहीं है; लोकप्रिय कहानियों में “हेलेना” नाम की राजकुमारी आती है, जिसका नाम किसी प्राचीन स्रोत में नहीं मिलता।

मेगस्थनीज़ की इंडिका: पाटलिपुत्र का यूनानी वर्णन

मेगस्थनीज़ सेल्यूकस का दूत था और लगभग 300 ईसा पूर्व पाटलिपुत्र (यूनानी में पालिबोथ्रा) में रहा। उसकी किताब इंडिका खो गई, पर उसके अंश बाद के लेखकों की किताबों में बचे हैं, जिन्हें जे. डब्ल्यू. मैक्क्रिंडल ने अंग्रेज़ी में एकत्र किया। इन अंशों के अनुसार:

  • पाटलिपुत्र गंगा और सोन के संगम के पास एक लंबा नगर था, जिसके चारों ओर खाई और लकड़ी की दीवार थी, जिसमें सैकड़ों बुर्ज और दर्जनों द्वार थे (एरियन, इंडिका 10)।
  • नगर का प्रशासन अधिकारियों के छह मंडलों में बँटा था, जो शिल्प, विदेशियों, जन्म-मृत्यु के पंजीकरण, व्यापार, उत्पादन और कर की देखरेख करते थे (स्ट्रैबो 15.1.50 से 52)।
  • भारतीय समाज को उसने सात वर्गों में बाँटा, जैसे दार्शनिक, किसान, चरवाहे, कारीगर, सैनिक, निरीक्षक और सलाहकार। यह उसकी अपनी समझ थी, जो भारतीय वर्ण व्यवस्था से मेल नहीं खाती।
  • राजा षड्यंत्र के डर से लगातार दो रातें एक ही बिस्तर पर नहीं सोता था (स्ट्रैबो 15.1.55)।

ध्यान रखें: ये एक विदेशी के अवलोकन हैं, जो दूसरों के हाथों से हम तक पहुँचे हैं। मेगस्थनीज़ ने कुछ कहानियाँ भी लिखीं जो साफ़ तौर पर कल्पना हैं, जैसे सोना खोदने वाली चींटियाँ। इसलिए हर बात को परखकर पढ़ें।

जैन परंपरा: चंद्रगुप्त के अंतिम वर्ष

जैन परंपरा, ख़ासकर हेमचंद्र का परिशिष्टपर्वन और श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) के लगभग सातवीं सदी से आगे के शिलालेख, कहती है कि बारह साल के अकाल के समय चंद्रगुप्त ने राज छोड़ दिया, जैन आचार्य भद्रबाहु के साथ दक्षिण गए, मुनि बने और श्रवणबेलगोला की चंद्रगिरि पहाड़ी पर सल्लेखना (धीरे-धीरे आहार त्यागकर देह छोड़ना) से जीवन समाप्त किया।

यह परंपरा है, समकालीन रिकॉर्ड नहीं। कई इतिहासकार इसे संभव मानते हैं, कुछ संदेह करते हैं। चंद्रगिरि पहाड़ी पर “चंद्रगुप्त बसदि” नाम का मंदिर और भद्रबाहु गुफा आज भी इस परंपरा से जुड़े हैं। सल्लेखना जैन धर्म की एक धार्मिक प्रथा है और इसे उसी सम्मान से समझना चाहिए।

पढ़ाई और प्रोजेक्ट के लिए सुझाव

प्रोजेक्ट में हर दावे के आगे स्रोत की श्रेणी लिखें: यूनानी, शिलालेख, या बाद की परंपरा। उनके पोते के बारे में सम्राट अशोक के शिलालेख और उनके मार्गदर्शक माने जाने वाले चाणक्य के बारे में चाणक्य के विचार पढ़ें।

आप Yuga ऐप में चंद्रगुप्त मौर्य से आवाज़ या टेक्स्ट में बात करके इंटरव्यू का अभ्यास कर सकते हैं। उनके अपने शब्द नहीं बचे, इसलिए यह स्रोतों से बना एक AI पुनर्निर्माण है, असली चंद्रगुप्त नहीं, और यह ग़लती कर सकता है। प्रोजेक्ट में मेगस्थनीज़ के अंश और इतिहासकारों की किताबें उद्धृत करें।

लोग क्या पूछते हैं

चंद्रगुप्त मौर्य ने मौर्य साम्राज्य की स्थापना कब की?
लगभग 321 ईसा पूर्व चंद्रगुप्त ने मगध के नंद वंश को हटाकर पाटलिपुत्र पर अधिकार किया, और यहीं से मौर्य साम्राज्य की शुरुआत मानी जाती है। सही वर्ष पर इतिहासकारों में कुछ सालों का अंतर है। उन्होंने लगभग 297 ईसा पूर्व तक राज किया, जिसके बाद उनके पुत्र बिंदुसार राजा बने।
मेगस्थनीज़ कौन था?
मेगस्थनीज़ यूनानी राजा सेल्यूकस प्रथम का दूत था, जो लगभग 300 ईसा पूर्व चंद्रगुप्त के दरबार पाटलिपुत्र में रहा। उसने भारत पर इंडिका नाम की किताब लिखी, जो अब खो चुकी है। उसके अंश स्ट्रैबो, एरियन और डियोडोरस जैसे बाद के लेखकों की किताबों में बचे हैं।
चंद्रगुप्त मौर्य और सेल्यूकस के बीच क्या संधि हुई?
लगभग 303 ईसा पूर्व हुई संधि में सेल्यूकस ने सिंधु के पश्चिम के कुछ इलाक़े, आज के अफ़ग़ानिस्तान और बलूचिस्तान के हिस्से, चंद्रगुप्त को दिए और बदले में 500 युद्ध हाथी लिए। स्ट्रैबो के अनुसार एक विवाह संबंध या आपस में विवाह का समझौता भी हुआ, पर इसका विवरण स्पष्ट नहीं है।
चंद्रगुप्त मौर्य की मृत्यु कैसे हुई?
जैन परंपरा के अनुसार उन्होंने राज छोड़कर आचार्य भद्रबाहु के साथ दक्षिण की यात्रा की और श्रवणबेलगोला में सल्लेखना से देह त्यागी, लगभग 295 ईसा पूर्व। यह बाद के जैन ग्रंथों और शिलालेखों पर आधारित परंपरा है; कोई समकालीन स्रोत उनकी मृत्यु का वर्णन नहीं करता।

स्रोत

  • Ancient India as Described by Megasthenes and Arrian, J. W. McCrindle (मेगस्थनीज़ की इंडिका के अंश)
  • स्ट्रैबो, भूगोल (Geography), पुस्तक 15
  • जस्टिन, Epitome of Pompeius Trogus, पुस्तक 15
  • रुद्रदामन का जूनागढ़ शिलालेख, लगभग 150 ईसवी
  • Chandragupta Maurya and His Times, Radhakumud Mookerji, 1943
  • A History of Ancient and Early Medieval India, Upinder Singh, 2008